November 25, 2020

तीन हजार किलो मिलावटी घी पकड़ा एक आरोपी गिरफ्तार

शुद्ध के लिए युद्ध, दीपावली पर बाजार में आना था हजारों किलो नकली घी

कोटा, (निसं.)। दादाबाड़ी पुलिस और डीएसटी पुलिस टीम ने सोमवार शाम छापामार कार्रवाई कर नकली घी बनाने का एक कारखाना पकड़ा है। नकली घी का कारखाना दादाबाड़ी शास्त्रीनगर स्थित एक मकान में चल रहा था। पुलिस ने मामले में एक युवक को गिरफ्तार कर करीब 3 हजार किलो नकली घी और कच्चा माल बरामद किया है। किसी को शक नहीं हो इसलिए यह पूरा काम घर से करता था।
दिवाली पर कोटा शहर व ग्रामीण इलाकों में नकली घी खपाने की प्लानिंग थी। इसने पूरे घर को ग्रीन नेट की जाली से ढक रखा था, ताकि घर में क्या चल रहा है, किसी को एकाएक पता न चले। इस जानलेवा घी को बेचने के लिए भी इसे कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ी, क्योंकि बड़े ब्रांड की पैकिंग के कारण नकली घी आसानी से बाजार में जा रहा था। पैकिंग भी ऐसी कि आम आदमी के लिए इसे पहचानना मुश्किल है। इस घी को बनाने में सोया तेल, वनस्पति घी, कुछ मात्रा में असली देशी घी और खुशबू के लिए एसेंस का इस्तेमाल किया जाता था।
एसपी गौरव यादव ने बताया कि डीएसटी टीम को मुखबीर से सूचना मिली थी। इसके बाद कार्रवाई की गई। मकान नं. 209 शास्त्री नगर, दादाबाड़ी में यह कारखाना चल रहा था। यह मकान रमेश कुमार गर्ग का है। जिसमें आरोपी राजू सोनी पुत्र रामपाल सोनी उम्र 40 साल निवासी गांव राजमहल थाना दूनी जिला टोंक किराए से रहकर यह काम कर रहा था। पुलिस ने राजू को मौके से गिरफ्तार किया है।

मोहल्ले को नहीं था गोरखधंधे का पता: जब पुलिस मौके पर छापा मारने गई तो वहां मौजूद पड़ौसी हक्के-बक्के रह गए। मकान नं. 209 शास्त्रीनगर, दादाबाड़ी रिहायशी पॉश कॉलोनी में शुमार हैं, ऐसे में यहां ऐसा काम चल रहा होगा। इसकी किसी को भनक तक नहीं थी। पुलिस कार्रवाई के दौरान भी एक महिला पूरे समय मंदिर में सेवा पूजा कर रही थी। पड़ौसियों से पूछने पर वे बोले कि इनके घर पर ऐसा काम चल रहा था, उन्हें नहीं पता था।

टीम ने मौके से यह माल किया बरामद: यहां से कृष्णा एगमार्क घी 88 पीपी, बिना रैपर का घी 60 पीपी, पारस घी 5 पीपा, नोवा घी 4 पीपा, दीप ज्योति रिफाइंड तेल 6 पीपा, सोयाबीन ऑयल 6 पीपा, महाकोष फोरच्युनर वनस्पति 8 पीपा, मिल्कफूड घी 11 पीपा, खुला घी 13 प्लास्टिक कैन, लगभग 45 किलो की कृष्णा ब्राण्ड घी, टेपराल इन्टरनल पन्नी और अमूल कृष्णा, सरस के कार्टूनों के कुल 8 बोरे बरामद किए हैं। 3000 किलो घी है। जिसका मूल्य करीब 15 लाख हैं।

नकली घी खाने से यह होता है नुकसान: वरिष्ठ सर्जन डॉ. धर्मराज ने कहा कि सोया तेल, वनस्पति घी जैसी हानिकारक वस्तुओं को घी समझकर खाने से सबसे बड़ा इफैक्ट लीवर पर पड़ता है। लीवर डेमेज हुआ तो पूरा पाचनतंत्र फैल हो जाएगा। आंतों की पाचन शक्ति कमजोर होगी। गुर्दे पर इसका बुरा असर होगा। हार्ट अटैक की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

ऐसे पहचाने असली-नकली घी: नकली घी की पैकिंग में अंतर साफ होता है। नकली घी की पॉलीथिन की पैकिंग ऊपर एक से दूसरे सिरे तक होती है, जबकि सरस घी की पॉलीथिन पर पैकिंग खड़ी सिलिंग में होती है। यह नकली और असली में अंतर करने का बेस्ट तरीका हैं। सरस की पैकिंग मशीन से, जबकि नकली घी की पैकिंग लोहे की पत्ती को गर्म करके व अन्य साधनों से होती है। ध्यान से देखने पर मोनो में भी अंतर पता लग सकता है।