November 26, 2020

दर्शक और सिनेमा का दिलचस्प रिश्ता

10 फीसदी से अधिक आबादी तक सिनेमाघरों की पहुंच

केंद्र सरकार ने सिनेमाघरों को खोलने का फैसला किया और इसके लिए कुछ गाउडलाइंस जारी की। कोरोना वायरस पैनडेमिक की वजह से करीब 6 महीनों से सिनेमाघरों पर ताले लटके रहे, जिसकी वजह से इंडस्ट्री को करोड़ों की चपत लगी है। केंद्र सरकार के इस फैसले से फिल्म उद्योग के चेहरे की मुस्कान भी लौटी है। उन्होंने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए आभार जताया। सिनेमाघरों का खुलना क्यों जरूरी था, इसका अंदाजा ऑरमैक्स मीडिया की एक रिपोर्ट से हो जाता है, जिसमें भारतीय दर्शकों और सिनेमाघरों के बीच गाढ़े संबंध का अध्ययन किया गया है। मीडिया कंसल्टिंग फर्म ऑरमैक्स मीडिया की यह रिपोर्ट भारतीय फि़ल्म उद्योग की अहमियत भी समझाती है। यह रिसर्च शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के 5,600 भारतीयों के सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गयी है, जो भारत में थिएटर दर्शक जगत का आकार-प्रकार बताती है। इस सर्वेक्षण के लिए डेटा कोविड-19 महामारी के कारण लगे लॉकडाउन से पहले जनवरी-मार्च 2020 में जुटाया गया था।

प्रति वर्ष औसतन 7 फिल्में सिनेमाघर में देखता है दर्शक
साइजिंग द सिनेमा- एन ऑरमैक्स मीडिया रिपोर्ट ऑन इंडियाज थियेट्रिकल ऑडियंस रीच शीर्षक से जारी इस रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, 14.6 करोड़ (145.7 मिलियन) भारतीय 2019 में फिल्म देखने के लिए कम से कम एक बार थिएटर (सिनेमाघर) गए। इस तरह भारत में सिनेमाघर की पहुंच इसकी आबादी के 10.5त्न हिस्से तक है। इन 14.6 करोड़ दर्शकों ने 2019 में 103.0 करोड़ थियेट्रिकल फुटफॉल्स का योगदान दिया। इसे सरल शब्दों में ऐसे समझा जा सकता है कि एक व्यक्ति हर साल औसतन 7.1 फिल्में (विभिन्न भाषाओं की) सिनेमाघर में देखता है।

मल्टीप्लेक्सेज का है बड़ा योगदान
इसी रिपोर्ट से मल्टीप्लेक्सों की अहमियत का भी पता चलता है। रिसर्च के अनुसार, सिनेमाघरों तक पहुंच रखने वालों का 58 प्रतिशत हिस्सा शहरी भारत से आता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भारत की 69प्रतिशत आबादी रहती है, लेकिन थिएटर जाकर फिल्म देखने वालों में उसका हिस्सा सिर्फ 42 प्रतिशत है, क्योंकि उन क्षेत्रों में थिएटर्स की संख्या कम है।

दक्षिण भारत के लोग ज़्यादा फिल्मी
दक्षिण भारत बेशक सिनेमाघरों की सबसे ज्यादा पैठ वाला क्षेत्र है। 2019 में वहां 22 प्रतिशत आबादी थिएटरों तक पहुंची थी। नतीजतन, यह थिएटर जगत में 44 प्रतिशत का योगदान देता है, जो कि भारत की जनसंख्या में इसके 21 प्रतिशत हिस्से के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। हिंदी (51प्रतिशत ), तेलुगु (21प्रतिशत ), तमिल (19प्रतिशत ) और हॉलीवुड (डब वर्जन्स सहित 15 प्रतिशत ) शीर्ष 4 भाषाएं हैं, जिनमें भारत के सिनेमाघरों में फिल्में देखी गई हैं।

केरल के लोग देखते हैं विभिन्न भाषाओं का सिनेमा
रिसर्च में भाषा को लेकर भी एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आया। एक औसत सिनेमाघर जाने वाला भारतीय 1.4 भाषाओं में फिल्में देखता है। ज्यादा भाषाओं में फिल्में देखने के मामले में केरल (1.7) और महाराष्ट्र (1.6) सबसे आगे हैं। इस रिपोर्ट और इसके निष्कर्र्षों के बारे में ऑरमैक्स मीडिया के संस्थापक और सीईओ शैलेश कपूर ने कहा- 14.6 करोड़ दर्शकों वाले भारत के थिएटर जगत का आकार इतना बड़ा तो है कि डेटा की बेहतर गुणवत्ता का होना जरूरी है। यह अध्ययन सिनेमाघर जाने वालों की जनसांख्यिकी के साथ-साथ भारत के विभिन्न राज्यों में भाषा के दोहराव (डुप्लीकेशन) को समझने जैसी कई चीजों पर केंद्रित है। यह सिनेमाघरों से जुड़े व्यवसाय के विभिन्न स्टेक होल्डर्स को ज्यादा जानकारियों के आधार पर है।

इटली में बंद हो रहे थिएटर
कोरोना ने आते ही फिल्म इंडस्ट्री की हालत खराब कर दी थी। एक और जहां कोरोना के चलते सूटिंग्स बंद हो गई थी, वही सिनेमा हॉल बंद होने के कारण फिल्में रिलीज होना भी बंद हो गई थी। एक लंबे अंतराल के बाद अनलॉक हुआ और इसके हर चरण में थोड़ी-थोड़ी छूट मिलने के चलते अब जाकर के सिनेमा हॉल खुलने लगे थे, लेकिन कोरोना के बढ़ते प्रभाव के चलते सिनेमा हॉल फिर से बंद होने लगे हैं। इटली में सिनेमा हॉल दोबारा से बंद किए जा रहे हैं। फिल्म क्रिटिक रमेश बाला ने इस बारे में ट्वीट किया है कि कोरोनावायरस पेंडेमिक के चलते इटली सारे सिनेमा थिएटर बंद करने जा रहा है। ऐसे में आशंका यही है कि अगर कोरोना इसी तरह से बढ़ता रहा तो अन्य देशों में भी सिनेमा हॉल फिर से बंद किए जा सकते हैं। भारत में तो सिनेमा हॉल अभी बस खुले ही हैं, उसमें भी कई राज्यों में तो अभी भी बंद हैं। ऐसे में बॉलीवुड और अन्य रीजनल फिल्म इंडस्ट्री पर फिर से संकट के बादल मंडरा सकते हैं।