September 27, 2020

दिखे नतीजे, प्रदेश में शराबी कम हो गए!

नई आबकारी नीति का असर, सरचार्ज भी डाल रहा असर

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 11 सितम्बर। राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार की ओर से लागू की गई नई आबकारी नीति के एक साल बाद उसके सकारात्मक परिणाम सामने आए है। प्रदेश में शराब के उपभोग में कमी लाने की सरकार की नई नीति को काफी हद तक सफल रही है. इससे शराब की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वित्त एवं आबकारी विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार राजस्थान स्टेट बेवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 2019-20 की बिक्री गत वर्ष के 46 लाख केस (बोतल) आईएमएफल के मुकाबले इस साल घटकर 29 लाख रह गई है। इसी तरह बीयर की बिक्री 149 लाख केस से घटकर 66 लाख केस रह गई। 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2019 की तुलना में आईएमएफल की बिक्री 37 फीसदी घटी है वहीं बीयर की बिक्री में 56 फीसदी की कमी आई है। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में शराब के उपभोग में कमी आई है। शराब पीने वालों की संख्या घट रही है। हालांकि इसके पीछे शराब पर लगाया सरचार्ज के साथ ही कोरोना भी एक बड़ी वजह रही है।

लगाया था सरचार्ज
गहलोत सरकार ने शराब का उपभोग कम करने एवं राजस्व बढ़ाने की मंशा से इस वर्ष 2 जून में आईएमएफल, बीयर, आरएमएल और देसी शराब पर 1.50 रुपए से 30 रुपए प्रति बोतल तक सरचार्ज लगाया था। सरकार के टैक्स बढ़ाने के बाद शराब की बिक्री में तेज गिरावट दर्ज की गई है। राज्य सरकार ने इस वर्ष 29 अप्रैल को भारत निर्मित विदेशी शराब पर 35-45 प्रतिशत तक अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी का ऐलान किया था। वहीं बीयर पर 45 फीसदी टैक्स बढ़ाया था। दूसरी तरफ कोरोना काल में शराब की दुकानें लंबे समय तक बंद रही थी। इसका असर भी पर पड़ा है लेकिन ऑवरऑल देखा जाये तो सभी कारणों के शराब की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ ना हो
गहलोत सरकार ने शराब की दुकानों की संख्या सीमित करने करने के साथ राज्य में 8 फरवरी 2020 को नई आबकारी नीति का ऐलान किया था। सरकार ने अपने सामाजिक दायित्व का निर्वाहन करते हुए ठेकों के लिए फीस राशि बढ़ा दी थी। पहले देसी मदिरा के लिए 6640 दुकानों का आवंटन था। उसे घटाकर 5543 दुकान कर दिया गया।