October 23, 2020

दिगज्जों की प्रतिष्ठा दांव पर

किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं इस बार निकाय चुनाव

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 14 अक्टूबर। राजस्थान में 3 शहरों में होने वाले 6 नगर निगमों के चुनाव केवल पार्षदों के लिए बड़ी चुनौती नहीं बल्कि इन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। जयपुर,कोटा और जोधपुर में होने वाले इन निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर लोकसभा स्पीकर और केंद्रीय मंत्री व 15 मंत्री विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर है। चुनाव में केवल बोर्ड बनाने या मेयर बनाने तक का मसला नहीं है बल्कि यह चुनाव इन नेताओं का सियासी कद भी तय करेंगे। जयपुर,जोधपुर और कोटा के 6 नगर निगम के चुनाव राजस्थान के भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं। अभी इन तीनों शहरों में भाजपा का बोर्ड था। भाजपा के लिए इसे बचाना बड़ी चुनौती होगी वही सत्ताधारी कांग्रेस हर हाल में चुनाव जीतना चाहेगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यह चुनाव केवल इन तीन शहरों में 6 नगर निगमों के चुनाव नहीं हैं बल्कि इन चुनावों के परिणाम संभाग से लेकर स्टेट और स्टेट से लेकर केंद्र तक नेताओं के सियासी कद को भी तय करने वाले हैं।

जयपुर निगम 
राजस्थानी जयपुर में भी कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के लिए भी यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। जयपुर लंबे समय से भाजपा का गढ़ रहा है। जयपुर के हेरिटेज व जयपुर ग्रेटर के 250 वार्डों में अपने पार्षदों को जिताने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर मंत्री और विधायकों पर रहेगी। 2018 के विधानसभा चुनाव में शहर की 8 में से 5 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया था लेकिन लोकसभा की सीट कांग्रेसी बड़े अंतर से हार गई थी। जयपुर में दोनों निगम में बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास, मुख्य सचेतक महेश जोशी के कंधों पर होगी तो वहीं कांग्रेस विधायक अमीन कागजी, रफीक टाक, गंगा देवी और कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशी पुष्पेंद्र भारद्वाज और अर्चना शर्मा जैसे नेताओं को भी अपनी पूरी ताकत लगानी होगी।सतीश पूनिया के अलावा सांसद रामचरण बोहरा, विधायक नरपत राजवी, अशोक लाहोटी, कालीचरण सराफ जैसे नेताओं को भी दमखम दिखाना होगा।

कोटा निगम
कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण में 140 सीटों पर चुनाव होने है। कोटा शहर से सांसद ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष हैं लिहाजा सीधे तौर पर उनकी चुनाव में कोई भूमिका नहीं रहेगी लेकिन निश्चित तौर पर इन चुनावों से उनकी प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है। कोटा में नगरीय विकास व स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल का भी प्रतिष्ठा का सवाल है। कोटा शहर को भाजपा का गढ़ माना जाता है। शहर में 4 में से 3 भाजपा विधायक हैं। कांग्रेस से केवल मात्र शांति धारीवाल ही कोटा शहर से विधानसभा का चुनाव जीते थे। ऐसे में दोनों निगमों में कांग्रेस का बोर्ड बनाना शांति धारीवाल के लिए आसान नहीं होगा।

जोधपुर निगम
जोधपुर की बात करें तो अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर में उत्तर और दक्षिण को मिलाकर 160 वादों पर चुनाव होंगे। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर से सांसद हैं ऐसे में वहां इन दोनों ही नेताओं के नाम पर मेयर और पार्षद के लिए चुनाव लड़े जाएंगे। इसके अलावा विधायक मनीषा पवार और सूर्यकांता व्यास के कामकाज के नाम पर भी वोट मांगे जाएंगे। जोधपुर नगर निगम लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रहा लेकिन पिछली बार यहां भाजपा ने जीत दर्ज की थी ऐसे में उप मुख्य सचेतक और जोधपुर के प्रभारी मंत्री महेंद्र चौधरी की कोशिश रहेगी कि इस बार वहां जीत दर्ज कर अशोक गहलोत की उम्मीदों पर खरा उतर आ जाए। देखना है कि जोधपुर में इस बार चुनावी ऊंट किस करवट बैठता है।