Fri. Jul 3rd, 2020

दुर्लभ सियागोश को अब बचाएंगे टाइगर

राजस्थान ने उठाया बीड़ा, भेडिय़ों पर भी रहेगा खास ध्यान

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 29 जून। न सिर्फ बाघ-बघेरे और भालू बल्कि अब राजस्थान सियागोश जैसी बेहद दुर्लभ प्रजाति और भेडिय़ों को बचाने में भी अहम योगदान देगा। पिछले 6 दशक से लगातार सियागोश की तादाद में राजस्थान हर हिस्से में कमी आ रही थी। प्रदेश के कुछ जंगलों में ही इसकी तादाद सिमट गई थी। 2017 तक आलम ये था कि प्रदेश में बाघ से भी कम महज 36 सियागोश वन्यजीव गणना में दर्ज किए गए थे। इस दुर्लभ बिल्ली को बचाने की योजना तो राजस्थान में काफी समय से की जा रही थी, लेकिन इसे अमली जामा कैसे पहनाया जाए ये समझ के परे था।अब रणथंभौर में सियागोश पर किये गए एक विशेष सर्वे के बाद वन विभाग ने एक कार्ययोजना सियागोश के संरक्षण के लिए तैयार की है, जिसमे वन विभाग उन इलाकों को चिह्नित कर रहा है, जहां सियागोश की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इससे इन इलाकों में सियागोश की सुरक्षा और संरक्षण पर खास ध्यान दिया जाएगा। राजस्थान के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर ने बताया कि हमेशा कुछ प्रजातियों पर ही संरक्षण की दिशा टिकी होती है, लेकिन अब वक्त है कि उन प्रजातियों पर भी फोकस किया जाए जो हमारी अनदेखी के चलते लुप्त होने के कगार पर पहुच गयी हैं।

इन जीवों के संरक्षण पर भी जोर

अरिंदम तोमर ने बताया कि प्रदेश में सियागोश, चींटीखोर, बिज्जू और भेडिय़े के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. हाल ही में रणथंभौर में खास स्टडी की गई है। इस स्टडी में करीब 35 तक सियागोश कि संख्या बताई गई है। ये बस इसलिए भी खास है कि कभी इतनी तादाद पूरे राजस्थान में थी। रणथंभौर बाघ परियोजना में अब तक 18 से 35 सियागोश की गिनती की जा चुकी है और बाकायदा कैमरा ट्रैप पद्धति से इन सभी के फोटो लिए जा चुके हैं। देर रात बहुत दबे पांव हरकत में आने वाली इस दुर्लभ बिल्ली पर स्टडी में रणथंभौर परियोजना के फील्ड डायरेक्टर मनोज पाराशर ने अहम भूमिका निभाई। अरिंदम ने बताया कि करीब 5 महीने में 215 लोकेशन्स पर कैमरा ट्रैप लगाकर सियागोश को ढूंढा गया है।