September 24, 2020

दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को खिलाइए चारा बीट

अक्टूबर से नवंबर तक कर सकते हैं बुवाई

शुष्क क्षेत्रों में पशु पालकों के सामने सबसे बड़ी समस्या हरे चारे कि आती है कि वो अपने पशुओं को क्या खिलाएं, जिससे दूध उत्पादन और पशुओं की सेहत पर कोई असर न पड़े, ऐसे क्षेत्रों में पशुपालक अपने पशुओं के लिए चारा चुकंदर की बुवाई कर सकते हैं। राजस्थान के जोधपुर में स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान एक नई तरह की चारा फसल ‘चारा बीट’ लेकर आया है। संस्थान चारा बीट के लिए कई राज्यों के किसानों को जागरुक भी कर रहा है। राजस्थान ही नहीं दूसरे कई राज्यों में चारा बीट के अच्छे परिणाम आए हैं।
केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. सुरेश तंवर बताते हैं, चारा बीट या चारा चुकंदर दूसरी चारा फसलों के मुकाबले कम क्षेत्रफल और कम समय में अधिक उत्पादन देती है। इसका पौधा सामान्य चुकंदर की तरह होता है, लेकिन आकार में काफी बड़ा होता है, जिसका वजन लगभग पांच से छह किलो तक हो सकता है। ब्रिटेन, फ्रांस, हालैंड, न्यूजीलैंड जैसे कई देश जहां पर बड़े स्तर पर पशुपालन हो रहा है, वहां पर ये फसल काफी लोकप्रिय है। भारत में पशुओं के चारा बीट कितना उपयोगी है, इसके लिए राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड और कई प्रदेशों के कृषि विभाग ने मिलकर काम भी शुरू किया है। डॉ. तंवर आगे बताते हैं, चारा बीट की फसल की बुवाई 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच में की जाती है, चार महीने में प्रति हेक्टेयर 200 टन तक उत्पादन मिल जाता है। चारा बीट में प्रति किलो 50 पैसे से भी कम लागत आती है, हमने यहां पर थारपारकर गायों को यही चारा दिया, जिनके दूध की पैदावार में आठ से दस फीसदी तक बढोत्तरी भी हुई है।

दोमट मिट्टी में अच्छा उत्पादन होता है, लेकिन ऊसर नमक प्रभावित मिट्टी में अच्छा उत्पादन मिलता है। इसके लिए 70 सेमी की दूरी पर बांध के साथ 20 सेमी ऊंचाई की मेड़ तैयार किया जाता है। एक हेक्टेयर में लगभग दो से ढाई किलो तक बीज लगता है। जोमोन, मोनरो, जेके कुबेर और जेरोनिमो चारा बीट की अच्छी किस्में है। यही नहीं मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे दूसरे कई प्रदेशों में भी पशुपालकों से अच्छे रिजल्ट मिले हैं।

बुवाई के बाद रखें इन बातों का ध्यान
चारा बीट की बुवाई के बाद खेत की सिंचाई करनी चाहिए, पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद करनी चाहिए, अगर पपड़ी गिरती है तो बुवाई के 4 दिन बाद हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। बाद में नवंबर के दौरान 10 दिनों, दिसंबर से फरवरी के दौरान 13 से 15 दिनों और मार्च से अप्रैल के दौरान 7 से 10 दिनों के बाद पर सिंचाई दी जानी चाहिए। इसे खारे और क्षारीय पानी के साथ भी लाभप्रद तरीके से उगाया जा सकता है। हाथों से निराई व छंटाई के साथ इसके ऊपर मिट्टी चढ़ाने का काम करना चाहिए। जरूरत पडऩे पर 15 दिन बाद दूसरी निराई की जानी चाहिए। किसी बड़ी बीमारी और कीट की सूचना नहीं है। लेकिन फिर भी सावधानी के लिए मिट्टी में पैदा होने वाले कीड़ों को नियंत्रित करने के लिए बुवाई से पहले क्विनालफॉस पाउडर (1.5 प्रतिशत) को 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लगाएं।

ऐसे खिलाएं पशुओं को चारा बीट
पशुओं को चारा के साथ मिलाकर खिलाया जाना चाहिए। फसल की जड़ों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर सूखे चारे में मिलाया जा सकता है। गायों और भैंसों के लिए खुराक हर दिन 12 से 20 किलो/पशु और छोटे जुगाली करने वालों के लिए प्रतिदिन 4 से 6 किलो/पशु होती है। प्रगतिशील वृद्धि के साथ छोटी मात्रा में खिलाना शुरू करें ताकि सामान्य भोजन राशि 10 दिनों तक पहुंच सके।