October 23, 2020

देश के 539 थानों में नहीं हैं टेलीफोन

200 पुलिस स्टेशन चल रहे हैं बिना वायरलेस सिस्टम के

नई दिल्ली, 19 सितम्बर (एजेंसी)। देश की पुलिस का हाल कैसा है, इसका जवाब संसद सत्र के दौरान मिला है। करीब हर राज्य का मुख्यमंत्री अपनी पुलिस को सर्वश्रेष्ठ बताने का प्रयास करता है, इस सच्चाई से भी पर्दा उठ गया है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी के अनुसार, देश के 539 थानों में टेलीफोन ही नहीं है। इतना ही नहीं, 200 पुलिस स्टेशन ऐसे हैं, जहां पर वायरलेस सिस्टम अभी तक नहीं लग सका है।
देश में कुल थानों की संख्या 16587 है। असम में कुल थाने 343 हैं, जबकि इनमें 140 थानों में टेलीफोन ही नहीं है। पंजाब में 422 थाने हैं, लेकिन यहां भी 67 थाने बिना दूरभाष के चल रहे हैं। भाजपा के राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा के पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी.किशन रेड्डी ने बताया, मध्यप्रदेश में 59 पुलिस स्टेशन ऐसे हैं, जहां वायरलेस सिस्टम नहीं लगा है। तमिलनाडु में 55 थाने हैं, जिनमें वायरलेस नहीं है। मणिपुर के 25 थाने बिना मोबाइल/वायरलेस के चल रहे हैं। इस राज्य के कुल 79 पुलिस थानों में से 59 थानों में टेलीफोन नहीं है। मेघालय के 73 थानों में से 57 थाने बिना टेलीफोन के चल रहे हैं, जबकि 15 थाने ऐसे हैं, जिनमें वायरलेस नहीं है। मिजोरम में भी 38 थानों में से 26 बिना टेलीफोन के काम कर रहे हैं। बता दें कि पुलिस स्टेशनों की स्थिति को लेकर जो डाटा जारी किया गया है, वह एक जनवरी 2019 के मुताबिक है।

इन राज्यों में बने हैं, किलेबंद पुलिस थाने
पूर्व में 400 पुलिस स्टेशनों के निर्माण के लिए वामपंथी उग्रवाद प्रभावित 10 राज्यों में किलेबंद पुलिस स्टेशन बनाने की एक अलग योजना तैयार की गई है। वर्तमान में सात राज्यों आंध्रप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना के जिलों के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में 250 किलेबंद थाने बनाने के लिए विशेष अवसंरचना के तहत काम हो रहा है। ये ऐसे थाने हैं, जहां नक्सली हमला बोल कर हथियार और गोला बारूद लूट लेते हैं। इनसे बचने के लिए पुलिस थानों को किले का आकार दिया जा रहा है। राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने यह सवाल भी पूछा था कि थानों में तैनात कर्मियों के लिए कंप्यूटर चलाने की कुशलता जांचने के लिए कोई परीक्षा आदि आयोजित की जाती है। इसके जवाब में गृह राज्यमंत्री ने कहा, यह जिम्मेदारी संबंधित राज्यों की है।