September 19, 2020

दोस्त भारत को अति आधुुनिक तकनीक देगा इजराइल

चीन को किया इनकार

नई दिल्ली, 1 सितम्बर (एजेंसी)। लद्दाख में चीन से तनाव के बीच भारत अपने-आप को सैन्य मोर्चे पर पूरी तरह से तैयार कर रहा है। इसी सिलसिले में वो इजरायल से एक खास तरह का सर्विलांस सिस्टम खरीदने जा रहा है। अवाक्स एयरक्राफ्ट के नाम से ये सिस्टम अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं, जो मीलों दूर से चीन की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे। ये वही सिस्टम है, जिसे इजरायल ने चीन को देने से इनकार कर दिया था। इजरायल का अर्ली वॉर्निंग कंट्रोल सिस्टम हवा से ही नीचे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखता है। वैसे इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये लड़ाई के दौरान कमांड, कंट्रोल और बैटल मैनेजमेंट में मदद करते हैं। इसके जरिए एयरक्राफ्ट से लेकर पनडुब्बी को भी सचेत किया जा सकता है कि आगे उनके लिए कहां, क्या खतरा है और उससे कैसे बचा जा सकता है। कुल मिलाकर ये सिस्टम डिफेंसिव यानी रक्षात्मक और ऑफेंसिव यानी आक्रामक दोनों ही तरीकों से काम करता है।

दोनों ही तरीकों से काम
आधुनिक अवाक्स सिस्टम 400 किलोमीटर दूर से समस्या को पहचान लेता है। एक अवाक्स तकनीक वाला एयरक्राफ्ट अगर जमीन से 9000 मीटर की ऊंचाई पर है तो ये लगभग 312,000 किलोमीटर का एरिया कवर कर सकता है। ये एक लंबी-चौड़ी रेंज है, जो सीमा के आसपास से लेकर दूर-दराज तक किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रख सकती है। इस तरह का पहला सिस्टम 1930 में अमेरिका में बना था। इसके बाद से लगातार हर देश अपने लिए किसी न किसी तरह का अवाक्स तैयार करने की कोशिश करता आया है। इजरायल इसमें सबसे आगे खड़े देशों की श्रेणी में है। वहां के अवाक्स को इजरायल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज और एल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्रीज ऑफ इजरायल ने मिलकर तैयार किया है। इसका पहला काम सर्विलांस पर फोकस करना है। भारतीय वायु सेना के साथ भी इजरायल मिलकर ये सिस्टम बना रहा है। अब इसी सिस्टम के दो मॉडल भारतीय सेना खरीदने जा रही है।

जल्द ही इजरायल के साथ समझौता
जानकारों ने बताया कि भारत इजरायल से 2 ऐसे एयरक्राफ्ट लेगा। ये दोनों देशों के बीच उसी करार के तहत शामिल किया गया है, जिसके तहत युद्ध के साजोसामान के निर्माण से लेकर खरीदी भी शामिल है। बता दें कि फिलहाल इजरायल भारतीय सेना के लिए हथियारों का टॉप सप्लायर है। इजरायल हालातों को देखते हुए जल्दी से जल्दी इस डील के लिए पुश कर रहा है। ये डील 2 बिलियन डॉलर की है। उम्मीद की जा रही है कि भारतीय रक्षा मंत्रालय इसे लेकर जल्द ही इजरायल के साथ समझौते को अंतिम रूप दे सकता है। इजरायल पहले चीन को भी अवाक्स देने वाला था लेकिन अमेरिका ने टोक दिया। दो दशक पहले ही अमेरिका ने इजरायल को चीन को इस एयरक्राफ्ट की सप्लाई करने से मना किया था।