September 25, 2020

नाराज हैं लोग, अपने क्षेत्र में कैसे जाएं?

  • कांग्रेस विधायकों की पीड़ा
  • बिजली के मुद्दे पर खफा किसान और आम लोग

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 2 सितम्बर। बिजली बिल पर फ्यूल चार्ज लगाने और किसानों को मिलने वाली सब्सिडी बंद करने के मामले को लेकर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार अपनों के ही निशाने पर है। भाजपा और किसान संगठन इस मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। अब कांग्रेस विधायकों, संगठन पदाधिकारियों ने भी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन,दोनों राष्ट्रीय सचिवों विवेक बंसल व तरूण कुमार को साफ कह दिया कि बिजली के मुद्दे को लेकर उनका लोगों के बीच जाना मुश्किल हो रहा है। यही बात विधायक और पदाधिकारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी पूर्व में कह चुके हैं। इन नेताओं का कहना है कि बिजली के बिल पर सरचार्ज लगाने से किसानों एवं आम उपभोक्ताओं में काफी नाराजगी है। अगर सरचार्ज एवं किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी पर कोई निर्णय जल्द नहीं किया गया तो उनका क्षेत्र में जाना मुश्किल हो जाएगा। एक दर्जन से अधिक विधायकों एवं पदाधिकारियों ने यह बात सत्ता एवं संगठन के नेतृत्व तक पहुंचाई है। उर्जा मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला के समक्ष तो कई बार विधायक अपनी बात रख चुके।

डीबीटी का बहाना
राज्य की विधुत वितरण कंपनियों ने पहले तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर(डीबीटी) का बहाना बनाकर किसानों को दी जाने वाली 833 रुपये की मासिक सब्सिडी बंद कर दी और अब आम उपभोक्ताओं पर सरचार्ज लगा दिया। करीब एक साल से किसानों के बैंक खातों में सब्सिडी की रकम नहीं पहुंच रही थी कि अब इसे बंद ही कर दिया गया। राज्य के उर्जा मंत्री डा.बी.डी.कल्ला और विधुत वितरण कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि सब्सिडी देने से कंपनियों पर एक हजार करोड़ रुपये का आर्थिक भार आ रहा है। किसानों को पहले से ही सस्ती बिजली दी जा रही है। केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता मांगी गई थी लेकिन किसानों को सस्ती बिजली देने के लिए वहां से कोई मदद नहीं मिल रही। कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी, पी. आर. मीणा,मुरारी लाल मीणा और सरकार को समर्थन कर रहे निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश हुडला सहित कई नेताओं ने किसानों से जुड़े बिजली के मुद्दें को लेकर नाराजगी जताई है।

500 करोड़ वसूले जाएंगे
गहलोत सरकार ने 10 पैसे प्रति यूनिट सरचार्ज सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं से वसूलने का निर्णय लिया है। अगले तीन माह तक प्रदेश के 1 करोड़ 40 लाख उपभोक्ताओं से यह सरचार्ज वसूला जाएगा जिसकी कुल रकम 500 करोड़ रुपये से भी अधिक होगी। प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं से 6 रुपये और अघरेलू उपभोक्ताओं से 7 रुपये प्रति यूनिट बिजली का चार्ज वसूला जा रहा है। जयपुर डिस्कॉम के निदेशक ए.के.गुप्ता का कहना है कि यह पैसा तो हमें पिछले साल दिसंबर के पहले ही वसूलना था लेकिन कोरोना काल के कारण नहीं वसूला गया। यह पैसा जनरेटिंग पॉवर हाउसों को एरियर के रूप में दिया जाएगा। यह वसूली तीन माह के लिए होगी। उधर इस मुद्दे को लेकर भाजपा लगातार गहलोत सरकार को घेरने में जुटी है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।