Sat. May 25th, 2019

नारी को मीरा और पद्मिनी की तरह साहसी बनाओ

जयपुर, 17 मई। शहर के नाट्य प्रेमियों ने गुरुवार को राजस्थान की चार वीरांगनाओं मीरा, हाड़ी रानी, पन्नाधाय और पद्मिनी की कहानियों पर आधारित नाटक राजपूताना का लुत्फ उठाया। इसका लेखन और निर्देशन तपन भट्ट ने किया। इस नाटक की खासियत ये रही कि लगभग डेढ़ घंटे की इस प्रस्तुति में राजस्थान कि चार महान नारियों की कथाएं दिखाई गई पर दृश्य परिवर्तन के लिए एक बार भी फेड इन या फेड आउट का इस्तेमाल नहीं किया गया। दृश्य परिवर्तन के लिए निर्देशक ने कुशलता से संगीत और कपड़ों का सहारा लिया। बड़े बड़े राजस्थानी साफे और साडिय़ों से महल, मंदिर आदि बनाए गए और चुन्नियों के द्वारा बनाए गए थाल में हाडी रानी का कटा सर दिखाया गया जो आकर्षण का केंद्र रहा।
रसों के राजा रसराज के पास पांच स्वर जो पंच तत्वों के प्रतीक है रस की तलाश में आते हैं। रसराज उन्हें राजस्थान की भूमि पर भेजते हैं और कहते हैं कि राजपूताना कि नारी अपने आप रसों का भण्डार है उसमे श्रृंगार है, करुणा है, प्रेम है, वीरता है, वो अद्भुत है। किन्तु जब वो यहां आते है तो उन्हें यहां उन्हें डरी और सहमी नारी मिलती है जो समाज द्वारा शोषित है। वो नारी को उसका अतीत याद दिलाते है और बताते है कि ये नारी कभी मीरा कि तरह भक्ति और श्रृंगार कि मूरत थी, कभी हाड़ी की तरह आदमी साहसी और वीर थी, पन्नाधाय की तरह अद्भुत बलिदानी थी और पद्मिनी की तरह साहसी और शौर्य का प्रतीक थी। नारी को अपना अतीत याद आता है और नारी उसका शोषण करने वालों को चेतावनी देती है और कहती है कि क्या नारी का अस्तित्व चिंगारी बनकर ही जिन्दा रहेगा, अगर वो चिंगारी नहीं तो क्या नारी नहीं। नारी को मीरा बनाओ हाड़ी बनाओ पन्ना बनाओ पद्मिनी बनाओ। नारी को चिंगारी बनने पर मजबूर मत करो यदि वो चिंगारी बन गयी तो सब कुछ ख़ाक कर देगी। नाटक में विशाल भट्ट, अभिषेक झांकल, संवाद भट्ट, अन्नपूर्णा शर्मा, रिमझिम भट्ट, अखिल चौधरी, नवीन टेलर, झिलमिल भट्ट, विष्णु सैन, आशुतोष पारीक, तपन भट्ट, सौरभ भट्ट आदि कलाकारों ने भाग लिया, संगीत डॉ. सौरभ भट्ट-शैलेन्द्र शर्मा का था, प्रकाश परिकल्पना दीपक गुप्ता एवम नाटक का लेखन और निर्देशन तपन भट्ट का था।