Wed. Feb 19th, 2020

नेताओं ने दिल्ली में तेज की लॉबिंग

राजस्थान से राज्यसभा में खाली होने जा रही 3 सीटें

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 15 फरवरी। राजस्थान में राज्यसभा की खाली हो रही तीन सीटों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार होने के कारण राज्यसभा में जाने के लिए कांग्रेस के कई दिग्गजों ने दिल्ली दरबार में लॉबिंग तेज कर दी है। राजस्थान से राज्यसभा की दस में से तीन सीटें 10 अप्रैल को खाली होने जा रही हैं। लिहाजा तीनों सीटों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों के नेता अपने अपने समीकरण सेट करने में लग चुके हैं। वर्तमान में खाली हो रही तीनों सीटें बीजेपी के पास हैं लेकिन संख्या बल के अनुसार इनमें से 2 सीटें कांग्रेस के खाते में और एक सीट पर बीजेपी का ही कब्जा रहेगा हालांकि इन तीन सीटों के लिए निर्वाचन आयोग ने अभी तक कोई कार्यक्रम जारी नहीं किया है।

कांग्रेस का पलड़ा भारी
वोटों की गणित के मुताबिक राज्यसभा की खाली होने वाली तीनों सीटों में से दो सीटों पर कांग्रेस का पलड़ा भारी रहने वाला है। विधानसभा चुनाव 2018 के बाद बदले राजनैतिक समीकरणों का असर राजस्थान में 10 अप्रैल को रिक्त होने वाली राज्यसभा की तीन सीटों पर भी पडऩे वाला है। विधानसभा चुनावों से पहले राज्यसभा के चुनावों में प्रदेश की तमाम दस सीटों पर बीजेपी काबिज थी लेकिन सत्ता के बदलने से प्रदेश की राज्यसभा की सीटों में भी पार्टियों का गणित बदल गया और एक सीट पर कांग्रेस का कब्जा हो गया है।

कांग्रेस के कई दिग्गज लॉबिंग में लगे
कांग्रेस के लिए कहां जा रहा है कि दो में से एक सीट के लिए स्थानीय और एक सीट के लिए आलाकमान की ओर से भेजे नाम पर मोहर लगेगी। इसलिए कई दिग्गज अपने अपने समीकरण बिठाने में लग चुके हैं। सूत्रों की जानकारी के अनुसार फिलहाल कांग्रेस में प्रियंका गांधी, मुकुल वासनिक,गुलाम नबी आजाद,अविनाश पांडे का नाम राजस्थान से राज्यसभा के लिए चल रहा है। वहीं स्थानीय नेता के तौर पर जुबेर खान,रघुवीर मीणा,नमो नारायण मीणा,अश्क अली टाक, रामेश्वर डूडी के नाम चर्चा में आए हैं। माना जा रहा है कि गुलाम नबी आजाद और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पिछले दिनों जयपुर में मुलाकात इसी सिलसिले में हुई थी। कांग्रेस जानकारों ने बताया कि कांग्रेस की ओर से एक सीट पर ओबीसी (जाट) और एक सीट पर किसी दलित चेहरे को राज्यसभा में भेजा जा सकता है लेकिन सबसे अहम बात यह है कि राज्यसभा के लिए जो भी सदस्यों का चयन किया जाएगा उसमें वर्तमान राजनीतिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए होगा। खासकर दिल्ली विधानसभा के नतीजों को मद्देनजर रखते हुए रणनीति बनाई जाएगी। बीजेपी की बात करें तो अभी तक कोई पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन बताया जा रहा है कि वर्तमान तीनों सांसदों की वापसी मुश्किल लग रही है। फिर भी तीनों जोर आजमाइश लगे हुए हैं। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि वसुंधरा राजे खेमे के किसी चेहरे को शायद ही जगह मिल पाएगी। सूत्रों का कहना है कि विजय गोयल की वापसी न के बराबर है । नारायण पचारिया अभी न्यूटल खेल रहे हैं। संघ पृष्ठभूमि के चलते चांस बन सकते हैं लेकिन यह भी बताया जा रहा है कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व किसी नए चेहरे को ही राजस्थान से राज्यसभा भेजेगी।

प्रदेश में एक सीट के लिए वोटों का गणित
प्रदेश की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर पूरे 200 विधायकों के मान्य वोट हैं। प्रदेश की इन तीनों सीटों की बात करें तो हर एक सीट को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के लिए 51 वोट चाहिएए इसमें कांग्रेस के पास 107, बीजेपी के पास 72 वोट हैं। अन्य छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों की कुल संख्या 21 है जिनमें से 13 निर्दलियों ने कांग्रेस को समर्थन दे रखा है। नंबरों की गणित के अनुसार 2 सीटों पर कांग्रेसए एक सीट बीजेपी के खाते में जाएगी। वोटों की गणित के अनुसार कांग्रेस को दो सीट जीतने के लिए 102 वोट चाहिए जो कि पर्याप्त रूप से उसके पास हैं। वहीं बीजेपी के पास 72 विधायक हैं। ऐसे में प्रथम वरीयता के 51 वोट चाहिए इसलिए बीजेपी के खाते में एक सीट जाएगी।

राजस्थान से पूर्व पीएम डॉ.मनमोहन एकमात्र कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य
पिछले साल मदन लाल सैनी के निधन के बाद एक सीट पर हुए चुनाव में पूर्व पीएम डॉ.मनमोहन सिंह निर्विरोध चुने गए थे। फिलहाल तीन सीटों से बीजेपी के रामनारायण डूडी,विजय गोयल और नारायण लाल पंचारिया का कार्यकाल पूरा हो रहा है।