November 23, 2020

पटरी नहीं बैठी, हर बार ब्यूरोक्रेट्स पर भारी पड़ते रहे मंत्री

8 अफसरों को अब तक हटना पड़ा

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 30 अक्टूबर। प्रदेश में एक बार फिर मंत्री और ब्यूरोक्रेट्स आमने-सामने हैं। इस बार विवाद गहलोत सरकार के कद्दावर मंत्री शांति धारीवाल और अजमेर की संभागीय आयुक्त आरुषि मलिक के बीच अधिकारों को लेकर हुआ है। इस पर मंत्री ने संभागीय आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंत्रियों से भिडऩे वाले ब्यूरोक्रेट्स पर अक्सर तबादले की गाज गिरती रही है। विवादों में रहने वाले अफसरों का तबादला कर दिया जाता है। नये घटनाक्रम में भी इससे इनकार नहीं किया जा रहा है क्योंकि मौजूदा सरकार का अब तक का इतिहास यही रहा है।

इन मंत्रियों और ब्यूरोक्रेट्स में हो चुकी है भिड़ंत
पूर्व पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह लगातार ब्यूरोक्रेट्स को अपने निशाने पर लेते रहे हैं। भरतपुर से लेकर जयपुर में पर्यटन विभाग तक के अफसरों से विवाद के कारण वे हमेशा सुर्खियों में बने रहे हैं। उन्होंने पूर्व एमडी एच गुइटे की विदेश यात्रा तक निरस्त करवा दी थी। उसके बाद गुइटे को आरटीडीसी से हटवा दिया। वहीं पर्यटन विभाग की प्रमुख सचिव श्रेया गुहा और तत्कालीन पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के बीच भी विवाद हो चुका है। मंत्री की ओर से लगाए आरोपों के बाद सरकार ने गुहा को वन विभाग में भेज दिया था।

नरेशपाल गंगवार व मंत्री उदयलाल आंजना: प्रमुख सचिव सहकारिता रहते हुए आईएएस नरेशपाल गंगवार और मंत्री उदयलाल आंजना के बीच कंट्रोवर्सी हुई। उसके बाद गंगवार को उद्योग विभाग में लगा दिया गया।

राजेश यादव व परिवहन मंत्री प्रताप सिंह: परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव एवं आयुक्त राजेश यादव और मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के बीच काफी समय तक अनबन रही। इसके चलते सरकार ने राजेश यादव को परिवहन से हटाकर जलदाय विभाग में लगा दिया।

मुग्धा सिन्हा व पूर्व मंत्री रमेश मीणा: खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की पूर्व सचिव मुग्धा सिन्हा और तत्कालीन मंत्री रमेश मीणा के बीच भी पटरी नहीं बैठी। इसके बाद मुग्धा को सिन्हा को वहां से हटा दिया गया।

समित शर्मा व मंत्री रघु शर्मा: एनएचएम के तत्कालीन निदेशक समित शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के बीच नियुक्तियों को लेकर विवाद हुआ। उसके बाद समित शर्मा को वहां से हटाया गया।

मंजू राजपाल व मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा: मंजू राजपाल के शिक्षा विभाग में रहते हुए उनकी शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा से लंबे समय तक कागज खरीद को लेकर अनबन चलती रही थी। इसको देखते हुए राज्य सरकार ने मंजू राजपाल को वहां से हटा दिया।

दिनेश कुमार व मंत्री प्रमोद जैन भाया: माइंस के मामलों को लेकर खान विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव दिनेश कुमार और मंत्री प्रमोद जैन भाया के बीच विवाद भी काफी चर्चित रहा। इसके चलते महज छह माह में ही दिनेश कुमार का ट्रांसफर कर दिया गया।