September 19, 2020

पुरवा याने दामादों का गांव, एक ही घर में बसी है पीढिय़ां

नई दिल्ली, 10 सितम्बर (एजेंसी)। देश का एक कोना ऐसा भी है जहां ब्याहता लड़की ससुराल नहीं जाती बल्कि दामाद लड़की के घर बस जाता है। उत्तरप्रदेश के कौशांबी में एक छोटा सा गांव यही पहचान लिए हुए है। गांव का नाम वैसे तो हिंगुलपुर है लेकिन इसे दामादों का पुरवा यानी दामादों के गांव के तौर पर जाना जाता है। दामादों वाले इस गांव की और भी कई खासियतें हैं। कन्या भ्रूण हत्या और दहेज हत्या में किसी वक्त बहुत आगे रहे यूपी के इस गांव ने अपनी बेटियों को बचाने के लिए अनूठा तरीका अपनाया। दशकों पहले गांव के बुजुर्गों ने लड़की को शादी के बाद मायके में ही रखने का फैसला किया। गांव की बेटियां जैसे ही ब्याहने लायक होती हैं, उनके रिश्ते की बात में ये एक अहम शर्त होती है। गांव में आने वाले दामादों को भी रोजगार मिल सके इसका बंदोबस्त गांव वाले मिलकर करते हैं। इस गांव में कानपुर, फतेहपुर,प्रतापगढ़ए इलाहाबाद और बांदा के दामाद रह रहे हैं। यहां 18 से 70 साल की उम्र तक की ब्याहताएं अपने पतियों के साथ बसी हुई हैं।