November 24, 2020

प्रदेश के सतही जल स्रोतों को नदियों से जोडऩे की महत्वाकांक्षी योजना में शामिल करें: कल्ला

राज्यों के जलदाय मंत्रियों की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस

जयपुर, 4 नवम्बर। जलदाय मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने प्रदेश में भू-जल की कमी और गांवों तक गुणवत्ता युक्त पानी पहुंचाने की चुनौती को देखते हुए केन्द्र सरकार से इस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया है। उन्होंने इंदिरा गांधी कैनाल, माही बांध, कड़ाना बैक वाटर, सोम कमला अम्बा बांध तथा जाखम बांध जैसे सतही जल के स्रोतों को नदियों को जोडऩे की महत्वाकांक्षी योजना के तहत शामिल करने की भी आवश्यकता जताई। डॉ. कल्ला मंगलवार को शासन सचिवालय स्थित एनआईसी सेंटर से केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में राज्यों के जलदाय मंत्रियों की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान में भू-जल की कमी के कारण 24 जिलों की 168 पंचायत समितियों के करीब 1740 गांवों को सतही जल स्रोतों से पेयजल उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में जलदाय विभाग के शासन सचिव नवीन महाजन, मुख्य अभियंता (शहरी एवं एनआरडब्ल्यू) सीएम चौहान, मुख्य अभियंता (ग्रामीण) आरके मीना, मुख्य अभियंता (तकनीकी) दिनेश गोयल के अलावा अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

सतही जल स्त्रोतों से पेयजल ही स्थाई समाधान: डॉ. कल्ला ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पूरे प्रदेश में अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के आधार पर घरेलू जल सम्बन्धों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति के प्रयास किये जा रहे है, परन्तु विषम भौगोलिक परिस्थितियों, रेगिस्तानी भू-भाग, गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों की अधिकता के साथ ही राजस्थान के अधिकतर क्षेत्र में स्थायी भू-जल स्रोतों की उपलब्धता नहीं होने के कारण पेयजल सतही जल स्त्रोतों के माध्यम से ही उपलब्ध कराया। जाना ही दीर्घकालीन एवं स्थाई समाधान है। उन्होंने कहा कि पेयजल योजनाओं के लिए आधारभूत ढांचे का तो निर्माण किया जा सकता है परन्तु 55 लीटर प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति के लिए बाह्य सतही जल स्रोतों से जल की व्यवस्था करना चुनौती पूर्ण कार्य है।

जल योजनाओ के लिए मिले 90 प्रतिशत सहायता: जलदाय मंत्री ने कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री से आग्रह किया कि जल प्रदाय योजनाओं के लिए वर्ष 2013 से पूर्व की तरह राजस्थान को मिल रही 90 प्रतिशत हिस्सा राशि को फिर से बहाल किया जाए।