September 21, 2020

प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों का प्लाज्मा थेरेपी से नि:शुल्क उपचार

  • चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, प्रदेश में कोविड-19 रोकथाम के लिए व्यापक प्रबंध
  • उप जिला अस्पतालों तक वेंटिलेटर की आपूर्ति की

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 22 अगस्त। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कोराना संक्रमण रोकने के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ की भर्तियां की गई हैं। पीपीई किट, मास्क, टेस्ट लेब एवं वेंटिलेटर की पर्याप्त व्यवस्था है। उप जिला अस्पतालों तक वेंटिलेटर की आपूर्ति की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों का प्लाज्मा थेरेपी उपचार बिल्कुल नि:शुल्क किया जा रहा है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री शुक्रवार को विधानसभा में कोरोना महामारी एवं उसके आर्थिक दुष्प्रभाव पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सदन के 25 सदस्यों ने चर्चा में भाग लेकर अपने बहुमूल्य सुझाव दिए हैं। यह संक्रमण से फैलने वाली बीमारी है, जिसे रोकने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं। कोराना काल में डॉक्टरों की भर्ती कर नियुक्ति दी गई है और दो हजार डॉक्टरों की जल्द नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने बताया कि 12 हजार 500 नर्सिंगकर्मियों की भर्ती कोर्ट केस की वजह से अटकी हुई थी जिसकी नियुक्ति का भी रास्ता साफ हो गया है। फॉर्मासिस्ट एवं लैब टेक्निशियन की नियुक्ति प्रक्रियाधीन है तथा रेडियोग्राफर की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) के 6 हजार 300 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी गई है।

मरीजों के इलाज की पुख्ता व्यवस्था
डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि राज्य में कोराना संक्रमित मरीजों के इलाज की पुख्ता व्यवस्था की गई है। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) के माध्यम से प्रक्रियानुसार एवं पारदर्शी ढंग से पर्याप्त पीपीई किट, मास्क एवं सेनेटाइजर की खरीद की गई है। उप जिला चिकित्सालय स्तर तक वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी का भी उपयोग किया जा रहा है, जो बिल्कुल नि:शुल्क है।

स्वास्थ्य बीमा योजना का निर्बाध रूप से लाभ मिल रहा
उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को स्वास्थ्य बीमा योजना का निर्बाध रूप से लाभ मिल रहा है। इसमें निरन्तर बीमा क्लेम का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत 13 दिसम्बर, 2019 से अब तक 6 लाख 98 हजार मरीजों को लाभ दिया गया है। इसके लिए 384 करोड़ रुपए का भुगतान करना है, जिसमें से 128 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है और 151 करोड़ रुपए का भुगतान शीघ्र कर दिया जाएगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने राज्य की सामान्य वित्तीय स्थिति एवं कोविड-19 के राज्य वित्त पर पड़े प्रभाव के संबंध में अवगत कराते हुए कहा कि लॉकडाउन आदि परिस्थितियों की वजह से जहां एक ओर औद्योगिक, वाणिज्यिक व व्यापारिक गतिविधियां बन्द हो गई, वहीं दूसरी ओर राज्य के आय संसाधनों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा कि कोविड आने से पूर्व केन्द्र सरकार की अदूरदर्शी नीतियों के कारण देश में आर्थिक मंदी के हालात उत्पन्न हो चुके थे, जिससे राज्य में भी राजस्व प्राप्तियों में कमी आई, कोविड महामारी ने ऐसे में आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पूर्व के वर्षों में की गई नोट बन्दी एवं जल्दबाजी में जीएसटी लागू किए जाने से देश की अर्थव्यवस्था का ढांचा चरमरा गया। इससे देश के सकल घरेलू उत्पाद की वार्षिक वृद्धि दर मात्र 5 प्रतिशत पर आ गई। इन गलत निर्णयों से देश व राज्यों की अर्थव्यवस्था पर गम्भीर प्रभाव पड़ा, जिससे वह अभी तक उबर नहीं पाई है। वर्ष 2018-19 व 2019-20 में राजस्व बढ़ोतरी दर में भारी कमी दर्ज की गई। डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि सातवें वेतन आयोग को लागू किये जाने से 2 हजार करोड़ रुपए के एरियर के भुगतान का भार तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की वर्ष 2017-18 व 2018-19 के बकाया राज्यांश की राशि लगभग 1 हजार करोड़ रुपये का भार प्रमुख है। इस प्रकार लगभग 15 से 20 हजार करोड़ रुपए के बकाया दायित्व थे, जिससे इस सरकार पर भारी दबाव पड़ा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने ना केवल गत सरकार द्वारा छोड़े गये लम्बित दायित्वों का भुगतान किया, वहीं राज्य को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने की दृष्टि से लोक कल्याणकारी कार्यों पर व्यय भी किया।

राजस्व प्राप्तियों में भारी गिरावट आई
उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के आरम्भ से ही साल के प्रथम दो माह में लगभग पूर्ण लॉकडाउन की स्थिति होने के कारण राज्य की राजस्व प्राप्तियों में भारी गिरावट आई, जबकि राज्य पर वेतन, पेन्शन, ब्याज भुगतान तथा सामाजिक सुरक्षा पेन्शन जैसे आवश्यक खर्चों पर भुगतान किये जाने की जिम्मेदारियां यथावत थी। डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा की गई अप्रत्याशित कटौती ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। लॉकडाउन की स्थितियों में जहां एक तरफ अत्यावश्यक सेवाओं को चलाये रखने की चुनौती थी, वहीं दूसरी तरफ अन्य राज्यों से अपने घरों में लौट रहे प्रवासी श्रमिकों को भी सहायता प्रदान करना आवश्यक हो गया।