November 24, 2020

प्रदेश में तेजी से विकसित हो कृषि और पशुपालन क्षेत्र : राज्यपाल

ऐसे पाठ्यक्रम विकसित करें जिससे कृषि एवं पशु में बढ़ोतरी हों

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 23 अक्टूबर। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति कलराज मिश्र ने कृषि एवं पशु पालन को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा है कि प्रदेश के कृषि एवं पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय अपने यहां ऐसे व्यावसायिक पाठयक्रम विकसित करें जिनसे इस क्षेत्र में प्रदेश का तेजी से विकास हो सके। उन्होंने कृषि एवं पशु पालन के स्थानीय एवं पाारम्परिक व्यवसायों के पाठयक्रम का विकास क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुसार इस तरह से किए जाने पर जोर दिया जिससे विद्यार्थी स्वावलम्बी, आत्मनिर्भर और सभी स्तरों पर सक्षम हो सके। कुलपतियों को उन्होंने नई शिक्षा नीति का गहराई से अध्ययन करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् एवं पशु चिकित्सा परिषद के मानदंडो के अनुरूप अपने यहां पाठ्यक्रम अद्यतन, नए व्यावसायिक पाठयक्रमों को प्रारंभ करने, शोध एवं अनुसंधान में उच्च गुणवत्ता स्थापित किए जाने के लिए भी विशेष रूप से निर्देश दिए।

प्रारूप राज्य में तय करने का भी निर्देश: राज्यपाल मिश्र यहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के संबंध में राजभवन में प्रदेश के 6 कृषि एवं पशु चिकित्सा-विज्ञान विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की ऑनलाइन बैठक में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को एक साथ बैठकर ऐसा प्रारूप राज्य में तय करने का भी निर्देश दिया, जिससे आत्मनिर्भर भारत की नई शिक्षा नीति व्यवहार में राजस्थान में लागू हो सके। कुलाधिपति मिश्र ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और भारतीय पशु चिकित्सा परिषद कृषि एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों के लिए व्यावसायिक मानक के रूप में कार्य करेगी। यह परिषदें सामान्य शिक्षा परिषद की सदस्य होंगी और पाठयक्रम, शोध एवं अन्य गतिविधियों के बीच समन्वयक का कार्य करेगी। उन्होंने इस संबंध में विश्वविद्यालयों को ऐसे बिंदुओं को चिन्हित करने के भी निर्देश दिए जिन्हें आईसीएआर व वीसीआई द्वारा उल्लेखित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे बिंदु विश्वविद्यालय अपने स्तर पर ही विद्यार्थी हित में तय कर लें, ताकि आईसीएआर व वीसीआई द्वारा प्रस्तावित रिपोर्ट आने पर नई शिक्षा नीति को लागू करने की तत्काल कार्रवाई हो सके।