November 26, 2020

प्रवासी भारतीयों की तरफ से आने वाली रकम भेजने में आई कमी

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के चलते विदेश में काम करने वालों के देश वापस लौटने और कमाई घटने से विदेश से भेजी जाने वाली रकम घटने लगी है। रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में इस बात के संकेत मिले हैं कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विदेश से भेजी जाने वाली रकम में 8.7 फीसदी की कमी देखी गई है। आरबीआई रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल यानी 2019 के जनवरी से सितंबर के मुकाबले 2020 में जनवरी से सितंबर के बीच इमीग्रेशन क्लियरेंस 67.5 फीसदी घट गया है। इस अवधि के दौरान जहां 2019 में 2.60 लाख लोग विदेश गए। वहीं, 2020 के दौरान केवल 85 हजार लोग ही जा सके हैं। देश में विदेशों से करीब 80 बिलियन डॉलर की रकम सालाना आती है। विदेश में काम करने वाले लोगों के देश वापस लौटने से उन्हें दोबारा रोजगार देना सभी राज्यों के लिए चुनौती बन सकती है। रिजर्व बैंक के मुताबिक ये मुश्किल इसलिए भी बड़ी होगी क्योंकि देश में मौजूदा दौर में घटती जीडीपी के चलते टैक्स कलेक्शन पर दबाव दिखेगा। ये ट्रेंड अगले कुछ सालों तक जारी रह सकता है।
केंद्र और राज्य सरकारों का महामारी पर खर्च बढ़ेगा इसके चलते दूसरी क्षमता विस्तार की योजनाओं पर कुछ दिनों के लिए रोकना पड़ सकता है। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि रिक्रूटिंग एजेंट और प्रोजेक्ट एक्सपोर्टर्स की तरफ से मिलने वाली नौकरियों में भारी कमी। वहीं वंदे भारत मिशन के तहत 137 देशों से 18 लाख से भारत वापस लौट आए हैं। इनमें विदेश में काम करने वाले और टूरिस्ट दोनों शामिल। भारत लौटने वालों में सबसे ज्यादा लोग केरल, दिल्ली, यूपी, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार और आंध्र प्रदेश से थे। इनमें से ज्यादातर लोग संयुक्त अरब अमिरात, साउदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान और अमेरिका से वापस भारत लौटे थे। रिजर्व बैंक की ओर से सरकार को सुझाव दिए गए हैं कि आने वाले दिनों के लिहाज से डिजिटलीकरण पर फोकस बढ़ाना चाहिए।