September 25, 2020

प्राचीन पत्थर, कसौटी खंभे नहीं हटाए जाएंगे

राम जन्मभूमि परिसर में साफ सफाई का काम तेज

अयोध्या, 24 अगस्त (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिरनिर्माण के लिए भूमि की साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। इस दौरान ट्रस्ट ने परिसर में एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा द्वारा लगाए गए पत्थर को न हटाने का निर्णय लिया ह। यह शिलापट 1902 में अयोध्या तीर्थ विवेचन की सभा के माध्यम से लगाया गया था। इसी के बगल में एक कसौटी का खंबा भी लगा है, जो राम जन्मभूमि के जन्म स्थान होने को प्रमाणित करता है जिसके कारण इस शिलापट को नहीं हटाया जा सका। इसी स्थल से ही भगवान श्री रामलला विराजमान स्थान को चिन्हित किया गया है। राम जन्म भूमि में विराजमान भगवान श्री रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के मुताबिक परिसर में लगी शिलापट श्री रामलला विराजमान स्थल को चिन्हित करता है। उनके मुताबिक अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा द्वारा राम जन्म स्थान को चिन्हित किया गया था। वही 9 नवंबर को आए फैसले में भी यह शिलापट रामलला के जन्म स्थान होने का प्रमाण देता है, इसलिए अभी तक इस शिलापट को नहीं हटाया जा सका है। यही गर्भगृह स्थल पर विराजमान रामलला के स्थान को दर्शाता है।

यथास्थिति बरकरार रहेगी
आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि रामलला के परिषद के बगल में स्थित कसौटी का खंबा ही सबसे महत्वपूर्ण ह। इसमें लगे हुए प्राचीन पत्थर में यह स्पष्ट दर्शाया गया है कि यहां से इतनी दूर पर विराजमान रामलला का जन्म स्थान है। राम जन्म भूमि परिसर में समतलीकरण के दरमियान हर एक चीज हटाई गई लेकिन प्राचीन लगे पत्थर और कसौटी के खंभे को यथास्थिति बरकरार रखा गया है। वह यह दर्शा रहा है कि यहां पर राम जन्म स्थान है। उसी चिन्हांकन के हिसाब से भगवान राम के गर्भ गृह का निर्माण किया जाएगा। इन्हीं पत्थरों के माध्यम से फैसला आया था। इन्हीं कसौटी के खंभों से यह सिद्ध हुआ था कि यहां पर नीचे भगवान राम के मंदिर है। रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के मुताबिक राम जन्म भूमि के समतलीकरण निकले पुरातत्व के अवशेष और कसौटी के खंभे इन सब को सुरक्षित करके रामलला के श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखे जाएंगे।