October 20, 2020

फिर आ रहा है एक और ग्रहण

आकाश में होने वाली प्रमुख खगोलीय घटनाओं में एक ग्रहण भी है। एक और जहां यह वैज्ञानिकों के लिए खोज का विषय है। वहीं आमजन में यह भय की भावना (पूर्ण ग्रहण जब दिन में ही अंधेरा छा जाए) उत्पन्न करता है। ग्रहण को जहां विज्ञान सामान्य प्रक्रिया के तौर पर लेता है, वहीं अध्यात्म में यह दैत्य ग्रहों का देव ग्रहों पर भारी होने को दर्शाता है। अध्यात्म के अनुसार ही ये जहां जीवन पर अपना काफी प्रभाव डालता है, वहीं इसके चलते निगेटिव एनर्जी अपना प्रभाव बढ़ती है। इसी कारण इस समय कुछ खास नियमों का पालन करने के लिए भी कहा जाता है। यहां तक की पूजा घर भी इस काल में बंद कर दिए जाते हैं।

उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा
ऐसे में 2020 में लगने वाले ग्रहणों में से आखिरी चंद्र ग्रहण अगले महीने 30 नवंबर को लगने जा रहा है। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार इसका सीधा असर व्यक्ति के मन पर पड़ेगा, क्योंकि चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। साल 2020 का यह आखिरी चंद्र ग्रहण एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा, जो वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में होगा। यह चंद्र ग्रहण 13:04 से 17:22 तक दिखाई देगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह चंद्र ग्रहण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में होगा। इसलिए वृषभ राशि के जातकों को इस समय कुछ परेशानियों से गुजरना पड़ सकता है। इस बार लगने वाले चंद्रग्रहण में सूतककाल मान्य नहीं होगा।

ऐसे समझें उपच्छाया चंद्र ग्रहण
ग्रहण से पहले चंद्रमा, पृथ्वी की परछाईं में प्रवेश करता है, जिसे उपच्छाया कहते हैं। इसके बाद ही चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है। जब चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया में प्रवेश करता है, तब वास्तविक ग्रहण होता है। लेकिन, कई बार चंद्रमा धरती की वास्तविक छाया में जाए बिना, उसकी उपच्छाया से ही बाहर निकल आता है। जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया न पड़कर केवल उसकी उपछाया मात्र ही पड़ती है, तब उपच्छाया चंद्र ग्रहण होता है। इसमें चंद्रमा के आकार में कोई अंतर नहीं आता है, इसमें केवल चंद्रमा पर एक धुंधली सी छाया नजर आती है।

ग्रहण की धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं में चंद्र ग्रहण को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। इसी कारण से जब भी चंद्रमा पर ग्रहण लगता है तो इसका सीधा असर मन पर होता है। चंद्र ग्रहण का असर उन लोगों पर अधिक पड़ता है, जिनकी कुंडली में चंद्र पीडि़त हो या उनकी कुंडली में चंद्र ग्रहण दोष बन रहा है। इतना ही नहीं चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा पानी को अपनी ओर आकर्षित भी करता है, जिससे समुद्र में बड़ी-बड़ी लहरें काफी ऊचांई तक उठने लगती है। माना जाता है कि चंद्रमा को ग्रहण के समय अत्याधिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है। इसी कारण से चंद्र ग्रहण के समय हवन, यज्ञ, और मंत्र जाप आदि किए जाते हैं।