October 23, 2020

फिर चर्चा में आया विधानसभा भवन

199 हुई एमएलए की संख्या

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 8 अक्टूबर। इसे अजब संयोग कहा जाये या वास्तु दोष। राजस्थान विधानसभा के वर्तमान भवन में पिछले दो दशक से लगातार 5 बरस तक कभी भी 200 विधायक एक साथ इस भवन की छत के नीचे नहीं बैठे हैं। कांग्रेस विधायक कैलाश त्रिवेदी के निधन के बाद एक बार फिर यह संयोग बन गया है। एक सीट खाली हो जाने से अब फिर सदन में विधायकों की संख्या अब 199 हो गई है। अब 6 माह के अंदर उपचुनाव के बाद 200 की संख्या होगी।

2001 में नये भवन में शिफ्ट हुई थी विधानसभा
वर्ष 2000 तक राजस्थान विधानसभा जयपुर के पुराने शहर के एक भवन में चलती थी। 2001 में ज्योति नगर में इसका नया भवन बनकर तैयार हुआ तो विधानसभा यहां शिफ्ट हो गई। नये भवन में शिफ्टिंग के साथ ही तत्कालीन दो विधायकों भीमसेन चौधरी और भीखा भाई की मौत हो गई थी। 2002 में कांग्रेस विधायक किशन मोटवानी और बीजेपी विधायक जगत सिंह दायमा की मौत हो गई। उसके बाद वर्ष 2003 में रूपलाल मीणा का निधन हो गया। 2004 में गहलोत सरकार के तत्कालीन मंत्री रामसिंह विश्नोई की मौत हो गई थी। 2006 में विधायक अरुण सिंह और नाथूराम अहारी का निधन हो गया।

लगातार दोहराता गया है इतिहास
2008 से 2013 के सदन का कार्यकाल तो कई विधायकों के लिए अपशुकन भरा रहा। 2013 से 2018 के कालखण्ड में भी इस तरह की स्थिति देखने को मिली। इसमें 2017 में मांडलगढ़ से विधायक कीर्ति कुमारी का निधन हो गया। फरवरी 2018 में नाथद्वारा विधायक कल्याण सिंह का निधन हुआ। अप्रैल 2018 में मुंडावर से विधायक धर्मपाल चौधरी का निधन हो गया। 2018 में विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान रामगढ़ सीट पर बसपा प्रत्याशी की मौत हुई तो 199 सीटों पर ही चुनाव हुए। इस तरह जब विधानसभा का पहला सत्र शुरू हुआ तो 199 विधायक ही बैठे। रामगढ़ सीट पर हुए उप चुनाव में कांग्रेस की साफिया जुबैर विधानसभा में पहुंची तो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल संसद में पहुंच गए। इस तरह संख्या फिर 199 रह गई। अब विधायक त्रिवेदी की मौत हो गई और विधायकों संख्या फिर 199 में रह गई।

जादू टोना-टोटके तक पर चर्चा
15वीं विधानसभा सभा सत्र के दौरान तो सदन में विधायक भूत और जादू टोना टोटके तक पर चर्चा कर चुके हैं। तत्कालीन मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर तो यज्ञ-हवन या फिर गंगागजल से शुद्धीकरण की मांग कर चुके हैं। उस समय गुर्जर ने तत्कालीन अध्यक्ष कैलाश मेघवाल से हवन-पूजन कराने की मांग की थी।