September 24, 2020

बच्चों को फालतू घूमते देखा तो खोल दी नि:शुल्क पाठशाला

  • कुछ अलग, कुछ अनूठा
  • लॉकडाउन में भी रुकी नहीं उदयपुर के गरीब आदिवासी बच्चों की पढ़ाई

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 17 सितम्बर। कोरोना काल में निजी हो या सरकारी, सभी स्कूलों पर ताला लगा हुआ है। इस दौरान शहरी इलाके में रहने वाले बच्चे तो ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन स्कूलों के बंद होने का खामियाजा ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बच्चों को उठाना पड़ रहा है। ऐसे में जयपुर जिले के कोनोड़ कस्बे के एक युवा ने अपने गांव के बच्चों के भविष्य को सुधारने के लिए निशुल्क पाठशाला का संचालन शुरू किया जहां कोविड गाइड लाइन की पालन के साथ गांव के गरीब बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। उदयपुर जिले का कानोड़ कस्बा कभी शिक्षा नगरी के नाम से देश में अपनी अलग पहचान रखता था। वर्तमान दौर में क्षेत्र में शिक्षा की गूंज विलुप्त होती नजर आ रही है लेकिन यहां के युवाओं में शिक्षा का के प्रति जोश हिलोरें खाता दिखाई देता है और यही जोश कोरोना काल में भी देखने को मिल रहा है।

एक युवक आगे आया
ऐसे में कानोड़ कस्बे में रहने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए अनंत व्यास नाम का एक युवक आगे आया है। उसने बच्चों को पढ़ाने के लिए निशुल्क पाठशाला का संचालन शुरू किया। घर पर सीखो के नाम से शुरू हुई इस पाठशाला में गरीब आदिवासी बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने का प्रयास किया जा रहा है। अनंत के इस प्रयास से आस पास के गांव के बच्चे भी शिक्षा से जुड़े हैं, जिसका असर भी देखा जा रहा है।

खेल-खेल में पढ़ाई
यह आइडिया अनंत को लॉकडाउन के दौरान आया। लॉकडाउन के चलते वे भी गांव आ गए, जहां उन्होंने आदिवासी बच्चों फालतू घूमते देखा और उनके भविष्य को लेकर चिंता होने लगी। अनंत को निशुल्क पाठशाला चलाने का आइडिया आया। अनंत ने खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया जो बदस्तूर जारी है। कानोड़ कस्बे के गरीब बच्चों के बीच कोरोना काल में शिक्षा की अलख जगाए रखने का यह प्रयास अनंत का बेहद सराहनीय है। साथ ही उन लोगों के लिए भी संदेश है, जो कोरोना काल में भी शिक्षा के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं।