September 23, 2020

बदल जाएगा रेलवे का स्वरूप

प्रधानमंत्री का बड़ा फैसला

नई दिल्ली, 4 सितम्बर (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 13 लाख कर्मचारियों वाले भारतीय रेलवे को लेकर एतिहासिक फैसले लिए गए हैं। सरकार ने रेलवे बोर्ड और रेलवे की 8 अलग-अलग सर्विसों का पुनर्गठन कर दिया है। इसके तहत अब रेलवे बोर्ड के चेयरमैन आधिकारिक रूप से सीईओ की तरह काम करेंगे। रेलवे बोर्ड मेंबरों की तीन पोस्ट खत्म कर दी गई हैं। अब बोर्ड में चेयरमैन कम सीईओ के साथ सिर्फ 4 रेलवे बोर्ड मेंबर ही काम करेंगे। 27 जनरल मैनेजरों की स्केल को बढ़ा कर बोर्ड मेम्बरों के लगभग समकक्ष कर दिया गया है। रेलवे के अलग-अलग कामों के लिए अब तक 8 अलग-अलग परीक्षाएं (ग्रुप सर्विस) होती थी। अब इन 8 ग्रुप सर्विसेज को मर्ज कर इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस नाम की नई सेंट्रल सर्विस का गठन किया गया है। इंडियन रेलवे मेडिकल सर्विस को इंडियन रेलवे हेल्थ सर्विस का नाम दिया गया है।

अब तक रेलवे अधिकारियों को मिलने वाले काम, असाइनमेंट और सम्बंधित पोस्ट उनकी वरिष्ठता और उनके ग्रुप सर्विस के कोटे के आधार पर होती थीं। मर्जर के बाद अब सभी अधिकारियों का प्रमोशन उनकी क्षमता और परफार्मेंस के आधार पर होगा. इसी आधार पर उन्हें काम भी दिया जाएगा. इससे सभी को सामान अवसर प्राप्त हो सकेंगे.रेलवे के नए अधिकारियों को अब उनकी लम्बी सर्विस के दौरान एक विशेष क्षेत्र का विशेषज्ञ बनाया जाएगा. साथ ही रेलवे के सभी कामों के प्रति उनका एक ज़रूरी नज़रिया विकसित करने पर ज़ोर दिया जाएगा. इसका फ़ायदा ये होगा कि एक स्तर के किसी भी सीनियर अधिकारी को मैनेजमेंट स्तर की जि़म्मेदारी उसकी क्षमता के मानकों के आधार पर दी जा सकेगी. प्रमोशन में वरिष्ठता और ग्रुप सर्विस विशेष का कोटा खत्म- अब तक रेलवे अधिकारियों को मिलने वाले काम, असाइनमेंट और सम्बंधित पोस्ट उनकी वरिष्ठता और उनके ग्रुप सर्विस के कोटे के आधार पर होती थीं. प्रमोशन का आधार भी सिनियोरित्य और कोटा ही था, लेकिन मर्जर के बाद अब सभी अधिकारियों का प्रमोशन उनकी क्षमता और परफार्मेंस के आधार पर होगा. इसी आधार पर उन्हें काम भी दिया जाएगा. इससे सभी को सामान अवसर प्राप्त हो सकेंगे.रेलवे के नए अधिकारियों को अब उनकी लम्बी सर्विस के दौरान एक विशेष क्षेत्र का विशेषज्ञ बनाया जाएगा. साथ ही रेलवे के सभी कामों के प्रति उनका एक ज़रूरी नज़रिया विकसित करने पर ज़ोर दिया जाएगा. इसका फ़ायदा ये होगा कि एक स्तर के किसी भी सीनियर अधिकारी को मैनेजमेंट स्तर की जि़म्मेदारी उसकी क्षमता के मानकों के आधार पर दी जा सकेगी.