September 23, 2020

बरखा का आगमन…

बरखा का हो गया आगमन, प्रफुल्लित है धरती का कण-कण।
स्वागत में बरखा रानी के, द्वार खुल गए नदी दीवानी के।
गरज-गरज बरस रहे मतवाले बादल, नभ के नैनों में भर गया काजल।
सरक गई धूल कि मैली चादरें, भीग रहे हैं शैल- तरु होकर बावरे।
बरखा की पीकर मदिरा, झूम-झूम नाच रहा मयूरा।
बरखा का करके आलिंगन, कलियों का महक उठा यौवन।
बरखा के मोती लगाकर लगी इतराने , फसलों की चुनरिया लगी लहराने।
बरखा ने बसा दी अनोखी बस्ती, बचपन दौड़ा रहा पानी में कश्ती।
बरखा से महक गया हर आँगन, आंखों से भी बरस गया सुख सावन ।
बरखा बन गई अनुपम वरदान, भीग रहे सब बच्चे ,बूढ़े और जवान।

-मोनिका मधुरिमा