September 22, 2020

बर्फीली वादियों में बनियान पहनकर खेल!

Kullu: Indian army trucks depart towards Ladakh amid stand off between Indian and Chinese troops in eastern Ladakh, at Manali-Leh highway in Kullu district, Monday, July 6, 2020. (PTI Photo)(PTI06-07-2020_000110B)

चीन को हक्का-बक्का कर रही है एसएफएफ

नई दिल्ली, 7 सितम्बर (एजेंसी)। पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर अब चीन की चालबाजी नहीं चलेगी। 29-30 अगस्त की रात को भारतीय जवानों ने वहां ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया है। अब चीन के हर मूवमेंट पर हमारी नजर होगी यानी ऐडवांटेज हमारे पास है। और ये ऐडवांटेज हासिल हुआ है भारत की एक खुफिया फोर्स इस्टैब्लिशमेंट 22 (टूटू) की बदौलत। स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) के नाम से जानी जाने वाली यह फोर्स कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से कंट्रोल होती है। 1962 की जंग खत्म होते-होते, एसएफएफ का गठन कर दिया गया था। इसमें भारत में रहने वाले तिब्बती शरणार्थियों को शामिल किया जाता है। उन्हें शुरू में इंटेलिजेंस ब्यूरो, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रा) और अमेरिका की सीआईए ने ट्रेनिंग दी थी। कई दशकों तक फोर्स को चीन की न्यूक्लियर मिसाइलें तैनात करने की योजना पर नजर रखने को कहा गया। इसका हेडक्वार्टर चकराता (उत्तराखंड) में है। एसएफएफ में पांच बटालियन हैं जिनमें माउंटेन वार फेयर में ट्रेन्ड 5,000 कमांडोज हैं जो एलीट पैराट्रूपर्स हैं। एसएफएफ के पहले इंस्पेक्टर जनरल थे मेजर जनरल (रिटायर्ड) सुजन सिंह। वह दूसरे विश्व युद्ध में 22 माउंटेन रेजिमेंट के कमांडर थे। उन्हें मिलिट्री क्रॉस से सम्मानित किया गया था और ब्रिटिश भारतीय सेना में अच्छा-खासा कद था।

भयंकर ठंड में बनियान पहनकर खेलते हैं कमांडो
आर्मी का कोई भी अधिकारी ऑपरेशन में एसएफएफ की भूमिका पर बात नहीं करेगा। लेकिन सबने कहा कि लद्दाख व अन्य जगहों पर एसएफएफ की बटालियनें हैं। 15 कॉप्र्स के चीफ रहे लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता कहते हैं कि लद्दाख में मेरे साथ विकास यूनिट्स थीं। मैंने उन्हें 16,000 फीट ऊंचाई पर बनियान पहनकर वॉलीबाल खेलते देखा है। इस जमीन से उनका लगाव ज्यादा है।

बोलना मना है
एक रिटायर्ड ले. जनरल ने कहा, हमें उनके बारे में पता है लेकिन उनकी मौजूदगी का रिकॉर्ड नहीं है। हममें से जिन कुछ ने उनके साथ काम किया, वे शपथ से बंधे हैं। एलओसी पार सर्जिकल स्ट्राइक्स के समय उत्तरी कमान के प्रमुख रहे ले. जनरल डीएस हुड्डा कहते हैं कि यह वक्त है कि चीन के जिद्दी रवैये का भारत आर्थिक, कूटनीतिक और जरूरी पड़े तो सैन्य तरीके से करारा जवाब दे। उन्होंने कहा कि सेना किसी भी चैलेंज से निपटने को तैयार है।

मिशन के दौरान स्स्नस्न अधिकारी की मौत
स्स्नस्न के एक कंपनी कमांडर की लैंडमाइन ब्?लास्?ट में मौत हो गई है। एक जूनियर कमांडो भी घायल है। हादसा तब हुआ जब वे झील के दक्षिणी किनारे पर ऑपरेशन में थे। 1962 की जंग के समय बिछाई गई एक लैंडमाइन पर पैर पड़ गया था। एक अधिकारी के अनुसार, वे 29-30 अगस्?त की रात ऊंचाइयां हासिल करने वाले ऑपरेशन से सीधे तौर पर नहीं जुड़े थे। नीमा तेंजिन (53) की मौत के बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं रखी गई है।