September 22, 2020

बिना नींव के नुकीली चट्टान पर खड़ा किला

वल्र्ड हेरिटेज की सूची में भी शामिल राजस्थान के झालावाड़ का ऐतिहासिक गागरोन जलदुर्ग खड़ी नुकीली चट्टान पर बिना नींव के बरसों से खड़ा है। उत्तर भारत में अपनी तरह का एकमात्र किला किसी अजूबे से कम नहीं है। नैसर्गिक सौंदर्य और खनिज संपदा से भरपूर विंध्याचल पर्वत मालाओं से घिरा झालावाड़ जिला राजस्थान के दक्षिण पूर्वी कोने पर मालवा के पठार के किनारे अवस्थित है। झालावाड़ के इस ऐतिहासिक गागरोन किले का निर्माण डोड राजाओं ने 12वीं शताब्दी में करवाया था। बीजल देव डोड इसके राजा रहे हैं। तब इसका नाम डोडगढ़ था। इस किले पर अलाउद्दीन खिलजी, शेरशाह सूरी, अकबर, अचलदास खींची और देवन सिंह खींची का साम्राज्य रहा है। प्रताप सिंह खींची बाद में देश के महान संत एवं रामानंद संप्रदाय से जुड़कर संत पीपाजी के नाम से प्रसिद्ध हुए। वे भी यहां के राजा रहे हैं। गागरोन किले का देश के सामरिक व रणनीतिक रूप से इतना महत्व था कि यह दिल्ली से मालवा और गुजरात से मेवाड़ के बीच एकमात्र ऐसा किला था जिसे जीते बिना पूरे मध्य व पश्चिम भारत पर कब्जा करना काफी मुश्किल समझा जाता था।