September 21, 2020

ब्रह्माजी ने करवाया था गंधर्व विवाह

गर्ग संहिता में बताया गया है कि स्वयं ब्रह्माजी ने धरती पर आकर राधा और कृष्णजी का गंधर्व विवाह करवाया था। कृष्णजी के पिता उन्हें अक्सर पास में स्थित भंडिर गांव में घुमाने ले जाते थे। वहीं उनकी मुलाकात राधाजी से हुई और दोनों के बीच मित्रता हो गई। एक बार की बात है कि अचानक से आसमान में बिजली चमकी और चारों ओर अंधेरा हो गया तब रौशनी की एक किरण के राधारानी प्रकट हुई और ब्रह्माजी भी धरती पर आ गए। भगवान कृष्ण भी अपने बालरूप से किशोर रूप में आ गए। तब स्वयं ब्रह्माजी ने सखियों की मौजूदगी में राधा और कृष्ण का गंधर्व विवाह करवाया।

कृष्ण की मामी लगती थीं राधा
विद्वानों के अनुसार महाभारत में राधाजी के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है। वहीं भागवत पुराण भी उनके बारे में कुछ नहीं कहती। राधारानी के बारे में पद्मपुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है। इसके अनुसार राधा का जन्म बरसाने में वृषभानु नामक गोप के घर में हुआ था। वहीं कुछ का मानना है कि राधा का जन्म यमुना के निकट स्थित रावल ग्राम में हुआ था। रिश्ते में राधाजी कृष्ण की मामी हो गई थीं। दरअसल उनका विवाह कृष्ण की यशोदा माता के भाई रायाण से हुआ था।

राधा और रुक्मणी दो नहीं एक
कुछ विद्वानों का मानना है कि राधा नाम की कोई महिला थी ही नहीं। राधा ही रुक्मिणी थीं और रुक्मिणी ही राधा थीं। माना जाता है कि राधाजी का अलग से कोई अस्तित्व ही नहीं था। दोनों एक ही थीं। दोनों को ही देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। कहने को तो राधाजी का जन्म शुक्ल पक्ष में हुआ था और रुक्मिणीजी का जन्म कृष्ण पक्ष में हुआ था, लेकिन दोनों ही माता लक्ष्मी के अंश हैं। इस कारण दोनों को एक ही माना जाता है।