November 25, 2020

ब्रांड मोदी असरदार, नीतीश की नैया पार

नई दिल्ली, 11 नवम्बर (एजेंसी)। बिहार विधानसभा चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया है बिहार की जनता की नब्ज पकडऩा किसी के बस की बात नहीं है। चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल ने भले ही महागठबंधन के सिर पर जीत का सेहरा बांध दिया था लेकिन हकीकत इससे उलट निकली है। बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बन रही है और नीतीश कुमार अगले पांच सालों के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने को तैयार हैं। विधानसभा चुनाव में एनडीए को 125 सीटें, महागठबंधन को 110 सीटें, एलजेपी को 1 जबकि अन्य के खाते में 7 सीटें गई हैं। बिहार में एक बार फिर नीतीश कुमार ने साबित कर दिया कि उनका सुशासन बिहार की जनता की पहली पसंद है और वहां के लोग अब भी उन पर भरोसा करते है। हालांकि इस चुनाव को पूरी तरह से नीतीश कुमार के पक्ष में करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है जो एक बार फिर ब्रांड मोदी को साबितकरता है। मोदी ने जिस तरह बिहार में चुनावी रैलियां की उसके बाद से एनडीए पर बिहार की जनता का भरोसा बढ़ गया। प्रधानमंत्री ने लोगों को आगाह किया कि उनका वोट एक बार फिर बिहार में जंगलराज ला सकता है। प्रधानमंत्री की यही बात शायद बिहार की जनता के दिल में घर कर गई। इसके बाद चुनाव के दिन जो हुआ वह आज सबके सामने है।

एनडीए में बीजेपी के खाते में सबसे ज्यादा सीटें
बिहार के चुनाव नतीजों पर गौर करें तो एनडीए में बीजेपी के खाते में सबसे ज्यादा सीटें गई हैं। बीजेपी को 74 सीटें हासिल हुई हैं वहीं जनता दल यूनाइटेड के खाते में 43 सीटें गई हैं। इस गठबंधन की अन्य पार्टियों में वीआईपी और हम को 4-4 सीटें मिली है। चुनाव में महागठबंधन से बीजेपी को कड़ी टक्कर मिली है। महागठबंधन के खाते में 110 सीटें गई हैं। महागठबंधन में आरजेडी के खाते में 75 सीटें जबकि कांग्रेस को 19 सीटें मिली हैं। इस गठबंधन की अन्य पार्टियों में सीपीआईएमएल को 12 सीटें जबकि सीपीएम को 2 सीटें मिली है। सीपीआई के खाते में मात्र 2 सीटें गई हैं। सबसे खराब स्थिति एलजेपी की रही। चिराग पासवान के नेतृत्व में इस बार का चुनाव लड़ रही एलजेपी को केवल 1 सीटें मिली है।

सातवीं बार सीएम बनेंगे नीतीश
बिहार विधानसभा के चुनाव में जीत के साथ नीतीश कुमार एक और इतिहास रचने वाले हैं। वो बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर सातवीं बार शपथ लेंगे। बिहार में आरजेडी को हटाकर सीएम की कुर्सी पर बैठने वाले नीतीश कुमार ने सत्ता की बागडोर कभी अपने हाथ से फिसलने नहीं दी। नीतीश बहुमत के साथ भले ही 2005 में सीएम बने लेकिन इससे पहले साल 2000 में भी वो सीएम पद की शपथ ले चुके थे। हालांकि कुछ ही समय बाद बहुमत साबित न हो पाने का कारण उनकी सरकार गिर गई थी। 2005 में बीजेपी और जेडीयू जीते और 24 नवंबर 2005 को उन्होंने एक बार फिर सीएम पद की शपथ ली।

चिराग पासवान का शो फ्लॉप रहा
लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजय करार दिया और कहा कि लोगों ने उन पर भरोसा जताया है। लोजपा ने इस चुनाव में केवल एक सीट जीती है और चिराग का चुनावी सो फ्लॉप साबित हुआ। हालांकि कई सीटों पर जदयू को हराने में भूमिका निभाई है। लोजपा ने बिहार विधानसभा में 140 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किये थे और उसे 5.68 प्रतिशत मत मिले। चुनावी नतीजे आने के बाद पासवान ने ट्वीट किया कि उन्हें गर्व है कि उनकी पार्टी सत्ता के लिए झुकी नही। लोजपा के सभी उम्मीदवारों ने अपने दम पर बिना किसी गठबंधन के संघर्ष किया।

कांग्रेस- राजद बोली, धांधली हुई
मंगलवार को दिनभर जारी कांटे की टक्कर के बीच आखिरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राजग ने बहुमत का आंकड़ा (122) पार कर लिया लेकिन महागठबंधन के मुख्य दल राजद और कांग्रेस को अपनी हार पची नहीं और दोनो दलों ने मतगणना में धांधली का आरोप लगा दिया। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा,’बिहार चुनाव में हम कितना फर्जीवाड़ा देखेंगे? किशनगंज से कांग्रेस उम्मीदवार 1,266 मतों से जीता लेकिन उसे जीत का प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। लोकतंत्र की हत्या हुई है। सुरजेवाला ने दावा किया कि सकरा में कांग्रेस उम्मीदवार 600 मतों से जीता लेकिन उसे 1,700 मतों के अंत से हारा हुआ घोषित किया गया।

पहली बार 66 नए चेहरों को जीत
बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार नए चेहरों को तरजीह दी गई। चुनाव आयोग द्वारा जारी नतीजों के मुताबिक इस बार 66 नए उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। ये 66 उम्मीदवार किसी न किसी पार्टी से पहली बार चुनाव जीते हैं। इनमें से सबसे अधिक राजद के 30 ऐसे उम्मीदवार हैं, जो पहली बार विधायक बने हैं। इस बार के सदन का स्वरूप भी कुछ बदला-बदला सा नजर आएगा। बीजेपी ने इस बार 25 फीसदी युवा और पुराने कार्यकर्ताओं को टिकट दिया, जिनमें से 15 प्रत्याशियों ने जीत का झंडा बुलंद किया वहीं जदयू के 5 नए उम्मीदवार चुनाव जीते।