September 22, 2020

भगवान विष्णु के साथ होती है यमुना नदी और शेषनाग की पूजा

हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का बड़ा महत्व है, इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। अनंत चतुर्दशी इस बार तिथि के अनुसार 1 सितंबर को है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चततुर्दशी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने और अनंत सूत्र को बांधने से जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन कई जगहों पर धार्मिक झांकियां निकाली जाती है। अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु, यमुना नदी और शेषनाग जी की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार अनंत चतुर्दशी का व्रत मनुष्य को जीवन के सभी कष्टों से बाहर निकलता है, लेकिन अनंत चतुर्दशी व्रत के नियमों का पालन किए बिना आप इसे पूर्ण नहीं कर सकते हैं और न हीं इसके शुभफलों को प्राप्त कर सकते है।

चतुर्दशी पर व्रत के नियम
अंनत चतुर्दशी का व्रत करने वाले साधक को सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु, माता यमुना और शेषनाग जी की पूजा की जाती है, इसलिए इनकी पूजा अवश्य करें। इस दिन भगवान विष्णु के साथ कलश के रूप में माता यमुना और दूर्वा के रूप में शेषनाग जी को स्थापित करें। इस दिन अनंत सूत्र भी धारण किया जाता है, इसलिए पूजा के समय 14 गांठों वाला अनंत धागा भगवान विष्णु के चरणों में अवश्य रखें, इसके बाद ही इसे धारण करें। इसके अलावा अनंत चतुर्दशी की कथा अवश्य सुननी या पढऩी चाहिए। इस दिन व्रत रखने वाले को नमक का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए आपको इस दिन मीठा ही भोजन करना चाहिए।

चतुर्दशी का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल से अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत हुई। यह भगवान विष्णु का दिन माना जाता है। अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुव:, स्व:, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी। इन लोकों का पालन और रक्षा करने के लिए वह स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हुए थे, जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। इसलिए अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है।

बप्पा को करते हंै विर्सजित
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन होता है। इस दिन बप्पा का विसर्जन किया जाता है। इस बार यह तिथि 1 सितंबर को पड़ रही है। गणेश चतुर्थी से लेकर दस दिनों तक बप्पा का पूजन किया जाता है और ग्याहरवें दिन पूरे विधि-विधान के साथ बप्पा का विसर्जन किया जाता है। ‘गणपति बप्पा मोरिया, अगले बरस तू जल्दी आÓ के जयकारों के साथ अगले बरस जल्दी आने की कामना की जाती है। वैसे तो अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा का विसर्जन किया जाता है लेकिन कुछ लोग 5, 7, 9 दिनों में भी विसर्जन करते हैं।