Wed. Sep 18th, 2019

भद्रा और पंचक से मुक्त दिनभर मनाई जाएगी राखी

धनिष्ठा नक्षत्र के साथ सौभाग्य योग रहेगा रक्षाबंधन पर

जयपुर, 13 अगस्त। बाजारों में इन दिनों रंग-बिरंगी रााखियां सजी हुई है। भाई और बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन महज एक दिन बाद गुरुवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों मुताबिक इस बार राखी पर श्रावण शुक्ल पूर्णिमा गुरुवार को स्वतंत्रता दिवस के साथ कई संयोग में मनाई जाएगी। इस बार कई सालों बाद रक्षाबंधन पर भद्रा और पंचक का का साया नहीं होगा, जिससे बहनों को राखी बांधने के शुभ मुहूर्त को लेकर चिंता नहीं होगी। 19 साल बाद यानि सन 2000 के बाद दोनों पर्व एक साथ मनाए जाएंगे। पंडि़त मधुसुदन शास्त्री निवाणा के मुताबिक श्रावणी पूृर्णिमा पर सात साल बाद पंचांग के पांच अंगों की श्रेष्ठ स्थिति भी बन रही है। गुरुवार के दिन श्रवण, धनिष्ठा नक्षत्र, सौभाग्य योग, मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में यह पर्व मनाया जाएगा।

सोने और चांदी की राखियां बाजार में
बाजारों में त्योहार की रौनक देखते ही बन रही है। कार्टून से लेकर सोने, चांदी की राखियां बाजार में बिक रही है। वहीं इस बार रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस एक ही दिन होने के कारण तिरंगा राखी का क्रेज काफी देखने को मिल रहा है। बढ़ती महंगाई के दौर में भी सोने और चांदी के राखी का महत्व कम नहीं हुआ। सराफा बाजार में सोने और चांदी में सजी अनेक डिजाइनों में राखी उपलब्ध है। जिसे देखते ही आपका मन उसे खरीदने के लिए ललचा जाएगा और इनकी कीमत भी आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। वहीं दूसरी ओर राखी के स्टोन के मुताबिक ही उनके रंग और आकार भी होते हैं। प्रिशियस और सेमी प्रिशियस स्टोन लगी राखियां बाजार में उपलब्ध है। इस राखी के दाम स्टोन के दाम के आधार पर होते हैं। भारत के धार्मिक कार्य में चंदन की लकडिय़ां विशेष महत्व रखती हैं। बीते दौर में लकड़ी और मेटल का इस्तेमाल आम तौर से राखियों की सजावट में किया जाता था। इसका कारण यह था कि किसी और तरह के सजावट के समान उस समय कम हुआ करते थे। मेटल की राखी राजा की कलाइयों की शोभा बढाया करती थी।

चौघडिय़ा देखकर बांधे राखी
शास्त्रानुसार मोली, राखी और गुड़ शुभ माना जाता है। थाली में रोली-मोली, हल्दी, केसर, चावल मिठाई, नारियल, राखी रखें। भद्रा नहीं होने से राखी सुबह सूर्योदय के बाद 6.02 बजे से शाम 5.59 बजे तक बांधी जा सकेगी। इसके बाद रात को भी बांधी जा सकती है। पंडि़तों के मुताबिक शुभ के चौघडिय़ा में राखी बांधना अच्छा रहता है। गुरुवार को शुभ का चौघडिय़ा सुबह 6.02 बजे से 7.39 बजे तक, चर, लाभ का चौघडिय़ा सुबह 10.54 से दोपहर 1.30 बजे तक, अमृत का चौघडिय़ा दोपहर 3 बजे से 3.46 बजे तक, शुभ का चौघडिय़ा शाम 5.23 बजे शाम 7.01 बजे तक तथा अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.06 बजे से दोपहर 12.58 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त सबसे अच्छा माना जाता है।