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भागवत के प्रत्येक श्लोक में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की होती है चर्चा’

जयपुर, 11 जुलाई। श्री राधा सर्वेश्वर सेवा संस्थान के तत्वावधान में वैशाली नगर के टैगोर पब्लिक स्कूल के सभागार में चल रहे अष्टोत्तरशत श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में बुधवार को व्यास पीठ से मोहन शरण देवाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद भागवत महापुराण में शुभारंभ से लेकर विश्रामपर्यन्त तक यदि अवलोकन किया जाए तो भागवत के प्रत्येक श्लोक में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की ही चर्चा की गई है। महात्म्य के प्रारंभ में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को पुष्ट करने के लिए श्रीमहापुराण की कथा सूत महाराज के द्वारा भगवती भागीरथी मां गंगा के पावन तट पर की गई। इसके फलस्वरूप भक्ति, ज्ञान और वैराग्य तीनों ही तरूण होकर नृत्य करने लगे और प्रत्येक श्रोता के ह्रदय में भक्ति को देखकर परमात्मा प्रकट हो गए। उन्होंने कहा कि भागवत भक्ति रस का सागर है। इसमें गोते लगाने से मन प्रसन्न होता है और उस भक्त को निश्चित रूप से परमात्मा के दर्शन होंते है। जिस घर में भागवत की चर्चा होती है, वहां पर सदैव शांति रहती है। जीवन में यदि प्रसन्न रहना है तो अपने मन को प्रभु की भक्ति में समर्पित कर दो, क्योंकि जो सुख भक्तिकरने में है, वह सुख संसार के किसी भी धन, संपदा व एश्वर्य से प्रापत नहीं हो सकता है। कथा के प्रारंभ में केबीसी के संस्थापक व आयोजनकर्ता ओम प्रकाश मोदी ने श्रीमद भागवत की पूजा कर आरती उतारी और महाराज का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि कथा रोजाना दोपहर 3.30 बजे से शाम 6.30 बजे तक होगी। इस दौरान सुबह 7.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक अष्टोत्तरशत श्रीमद भागवत के मूल पाठ 10 से 16 जुलाई तक होंगे।