December 2, 2020

भूखे रह हाथियों को पाल रहे महावत

देश के एकमात्र हाथीगांव में हालात होने लगे खराब

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 7 नवम्बर। जयपुर के पास आमेर के कुंडा में 120 बीघा में बसे देश के एकमात्र हाथी गांव में हालात बेहद खराब है। इस साल मार्च माह से प्रारंभ हुए लॉकडाउन के बाद से लेकर अब तक हाथियों को पालने वाले महावतों के भूखे रहने की नौबत आ गई है। महावत परिवार खुद भूखे रह कर हाथियों को पाल रहे हैं। खुद का सब कुछ गिरवी रखकर हाथियों का पेट भर रहे हैं। राज्य सरकार ने कोविड को लेकर केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अतिरिक्त अपने स्तर पर कई मामलों में छूट दी है। पर्यटन केंद्र खुल गए, पर्यटक आने भी लगे हैं लेकिन हाथी गांव 8 माह से लॉकडाउन में फंसा है। बहुत कुछ अनलॉक हो गया लेकिन हाथी गांव अनलॉक नहीं हुआ। सरकार ने अब तक हाथी की सवारी की अनुमति नहीं दी। हाथी गांव में जाने पर पता चलता है कि महावत परिवार कितने दुखी हैं।
महावत रहमत का कहना है कि एक हाथी के प्रतिदिन की खुराक पर 2000 से 2500 रुपये तक खर्च होता है। महावत खुद के बच्चों को भूखा रखकर हाथियों का पेट भर रहे हैं। हाथी की सवारी की अनुमति नहीं मिलने से कमाई जीरो है। महावतों ने जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ ही शहर के विधायक परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास से इस बारे में कई बार आग्रह किया लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। महावत चाहते हैं कि सरकार हाथी की सवारी की अनुमति दे और अगर किसी कारण से नहीं देती है तो उन्हे अनुदान दे। महावतों का कहना है कि अब तो यह हालत हो गई कि हाथियों को पालना मुश्किल हो गया। कोरोना महामारी के 8 माह महावतों के लिए मुश्किल भरे रहे हैं। इस दौरान विभिन्न कारणों से 4 हाथियों की मौत हो गई।

हाथी की मौत हुई तो महावत ने आत्महत्या की
कर्ज लेकर महावत इन हाथियों को लाए थे लेकिन मौत से उनकी रोजी-रोटी छीन गई। अब उनके सामने समस्या यह है कि कर्जा कैसे चुकाया जाए। हथिनी चंचल की मौत से महावत राजपाल इतना दुखी हुआ कि उसने खुद ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बल्लू खान का कहना है कि करीब दो दर्जन परिवार रोजी-रोटी की तलाश में यहां से चले गए। बल्लू खान का कहना है कि एक हाथी प्रतिदिन 250 किलो गन्ना, 40 किलो सुखी ज्वार व 15 किलो रंजका खाता है। जयपुर के आमेर महल में हाथी की सवारी, विवाह समारोह,शोभायात्रा सहित अन्य कार्यक्रमों में हाथी मालिक अपना खर्च चलाते थे, जो अब बंद है। उन्होंने बताया कि हाथी एक जगह बैठे हैं। पशु चिकित्सकों का कहना है कि आमेर महल में हाथियों का चलना-फिरना बंद हो गया। हाथियों के नहीं चल पाने से उनकी पाचनक्रिया में मुश्किल हो रही है। हाथी को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन करीब 20 किलोमीटर चलना होता है लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा। हाथी मालिकों ने राज्य के पर्यटन सचिव आलोक गुप्ता व जयपुर जिला कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा से जल्द हाथी की सवारी शुरू करने का आग्रह किया है।

यह है विशेषता
जयपुर- दिल्ली बाइपास पर बसे हाथी गांव में हाथियों के रहने के लिए 63 शेड होम बने हुए हैं। एक ब्लॉक में तीन हाथी रह सकते हैं। इनके पास ही महावतों के रहने के लिए कमरे बने हुए हैं। यहां करीब 100 हाथी हैं। यहां प्राकृतिक वातावरण बनाए रखने के लिए पेड़.पौधे लगाए गए हैं।