November 25, 2020

मटर में चूर्णिल आसिता और मृदोमिल आसिता के लक्षण एवं रोकथाम

मटर की फसल के ये प्रमुख रोग हैं। जिसकी वजह से पैदावार में भारी कमी आती है, अत: इसकी पहचान और उपाय जानने आवश्यक है। सबसे पहले पत्तियों के ऊपरी भाग पर सफ़ेद-धूसर धब्बे दिखाई देते हैं जो बाद में बढ़कर सफेद रंग के पाउडर में बदल जाते हैं। ये फफूंद पौधे से पोषक तत्वों को खींच लेती है और प्रकाश संश्लेषण में बाधा डालती है जिससे पौधे का विकास रुक जाता है। रोग की वृद्धि के साथ संक्रमित भाग सूख जाता है और पत्तियां गिर जाती है। पत्तियों और अन्य हरे भागों पर सफेद चूर्ण दिखाई देती हैं जो बाद में हल्के रंग के सफेद धब्बेदार क्षेत्र हो जाते हैं। ये धब्बे धीरे-धीरे आकार में बढ़ जाते हैं और निचली सतह को भी कवर करते हुए गोलाकार हो जाते हैं। गंभीर संक्रमण में, पर्णसमूह पीला हो जाता है जिससे समय से पहले पत्तियां झड़ जाती है।

बचाव के कारगर उपाय
रोग की रोकथाम के लिए प्रति 500 ग्राम घुलनशील सल्फर या थिओफिनेट मिथाइल 300 ग्राम या प्रति 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर दें। पंद्रह दिन के अंतराल से हेक्ज़ाकोनाजोल या थायोफिनेट मिथाइल का स्प्रे करें। जैविक उपचार हेतु ट्राइकोडर्मा विरिडी 250 ग्राम/एकड़ + सूडोमोनास फ्लोरोसेंसञ्च 250 ग्राम/एकड़ की दर से छिड़काव करें।