October 23, 2020

महात्मा गांधी का शिक्षा दर्शन

गांधीजी का शिक्षा के क्षेत्र में भी विशेष योगदान रहा है। उनका मूलमंत्र था – शोषण-विहीन समाज की स्थापना करना। उसके लिए सभी को शिक्षित होना चाहिए। क्योंकि शिक्षा के अभाव में एक स्वस्थ समाज का निर्माण असंभव है। अत: गांधीजी ने शिक्षा के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों की व्याख्या की तथा प्रारंभिक शिक्षा योजना उनके शिक्षादर्शन का मूर्त रूप है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का व्यक्तित्व और कृतित्व आदर्शवादी रहा है। उनका आचरण प्रयोजनवादी विचारधारा से ओतप्रोत था। संसार के अधिकांश लोग उन्हें महान राजनीतिज्ञ एवं समाज सुधारक के रूप में जानते हैं। पर उनका यह मानना था कि सामाजिक उन्नति हेतु शिक्षा का एक महत्वपूर्ण योगदान होता है। अत: गांधीजी का शिक्षा के क्षेत्र में भी विशेष योगदान रहा है। उनका मूलमंत्र था – शोषण-विहीन समाज की स्थापना करना। उसके लिए सभी को शिक्षित होना चाहिए क्योंकि शिक्षा के अभाव में एक स्वस्थ समाज का निर्माण असंभव है। अत: गांधीजी ने जो शिक्षा के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों की व्याख्या की तथा प्रारंभिक शिक्षा योजना उनके शिक्षादर्शन का मूर्त रूप है। अतएव उनका शिक्षादर्शन उनको एक शिक्षाशास्त्री के रूप में भी समाज के सामने प्रस्तुत करता है। उनका शिक्षा के प्रति जो योगदान था वह अद्वितीय था। उनका मानना था कि मेरे प्रिय भारत में शिक्षा का प्रचार प्रसार तेजी से ऐर व्यापक तौर पर किया जाना चाहिए। उनका आचरण प्रयोजनवादी विचारधारा से ओतप्रोत था।
संसार के अधिकांश लोग उन्हें महान राजनीतिज्ञ एवं समाज सुधारक के रूप में जानते हैं। पर उनका यह मानना था कि सामाजिक उन्नति हेतु शिक्षा का एक मत्वपूर्ण योगदान होता है।

महात्मा गांधी और भारतीय शिक्षा
गांधीजी भारतीय शिक्षा को द ब्यूटीफुल ट्री कहा करते थे। इसके पीछे कारण यह था कि गांधी ने भारत की शिक्षा के बारे में जो कुछ पढ़ा था, उससे पाया था कि भारत में शिक्षा सरकारों के बजाय समाज के अधीन थी। स्व. डॉ. धर्मपाल प्रसिद्ध गांधीवादी चिन्तक रहे हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान, विज्ञान, समाज, राजनीति और शिक्षा को लेकर बहुत ही महत्वपूर्ण शोध किया है। गांधी के वाक्य द ब्यूटीफुल ट्री को जस का तस लेकर डॉ.धर्मपाल ने अपना शोध शुरू किया और अंग्रेजों और उससे पूर्व के समस्त दस्तावेज खंगाले। जो कुछ भारत में मिला उन्हें संग्रहालयों और ग्रंथालयों से लिया और जो जानकारी भारत से बाहर ईस्ट इंडिया कंपनी और यहां तक कि सर टामस रो से लेकर अंग्रेेजों के भारत छोडऩे तक की, इंग्लैंड में उपलब्ध थी, उसे वहां जाकर खोजा। डॉ. धर्मपाल ने अंग्रेजी कालीन घटनाओं का जो ऐतिहासिक अन्वेषण कर यह साबित किया कि जिस प्रकार उन लोगों ने न केवल हमारे अर्थशास्त्र और कुटीर उद्योग को समाप्त कर हमारे पूरे अर्थतंत्र को डस लिया, बल्कि भारत का सांस्कृतिक, साहित्यिक, नैतिक और आध्यात्मिक विखंडन भी किया जिससे भारत अपना भारतपन ही भूल गया और अंग्रेजी शिक्षा से आच्छन्न यहां के कुछ बड़े घरानों के लोग भारत भाग्य विधाता बन गए।

आधारभूत शिक्षादर्शन सिद्धान्त
गांधीजी ने शिक्षा के अधोलिखित आधारभूत सिद्धांतों का प्रतिपादन किया है-
(1) 7 से 14 वर्ष की आयु के बालकों की नि:शुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा हो।
(2) शिक्षा का माध्यम मातृभाषा हो।
(3) साक्षरता को शिक्षा नहीं कहा जा सकता।
(4)शिक्षा बालक के मानवीय गुणों का विकास करना है।
(5) शिक्षा ऐसी हो जिससे बालक के शरीर, हृदय, मन और आत्मा का सामंजस्यपूर्ण विकास हो।
(6) सभी विषयों की शिक्षा स्थानीय उत्पादन उद्योगों के माध्यम से दी जाए।
(7) शिक्षा ऐसी हो जो नवयुवकों को बेरोजगारी से मुक्त कर सके।

बच्चों को 3-एच (हार्ड, हैंज, हर्ट) की शिक्षा दी जाए

उनका शिक्षादर्शन उनको एक शिक्षाशास्त्री के रूप में भी समाज के सामने प्रस्तुत करता है। उनका शिक्षा के प्रति जो योगदान था वह अद्वितीय था।
उनका मानना था कि मेरे प्रिय भारत में बच्चों को 3 एच (हार्ड, हैंज, हर्ट)की शिक्षा दी जाए। शिक्षा उन्हें स्वावलंबी बनाये और वे देश को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देराष्ट्रपिता महात्मा गांधी का व्यक्तित्व और कृतित्व आदर्शवादी रहा है। उनका आचरण प्रयोजनवादी विचारधारा से ओतप्रोत था। संसार के अधिकांश लोग उन्हें महान राजनीतिज्ञ एवं समाज सुधारक के रूप में जानते हैं।
पर उनका यह मानना था कि सामाजिक उन्नति हेतु शिक्षा का एक मत्वपूर्ण योगदान होता है। उनका आचरण प्रयोजनवादी विचारधारा से ओतप्रोत था। संसार के अधिकांश लोग उन्हें महान राजनीतिज्ञ एवं समाज सुधारक के रूप में जानते हैं पर उनका यह मानना था कि सामाजिक उन्नति हेतु शिक्षा का एक महत्वपूर्ण योगदान होता है।

शिक्षा दर्शन के उद्देश्य
गांधीजी ने शिक्षा के उद्देश्यों को दो भागों में विभाजित किया है।
(1) शिक्षा का तात्कालिक उद्देश्य
(2) सर्वोच्च उद्देश्य तात्कालिक उद्देश्य जिनकों नियमित शिक्षा के माध्यम से शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है। जो कि इस प्रकार है-
(1) जीविकोपार्जन का उद्देश्य: गांधीजी के अनुसार शिक्षा ऐसी हो जो आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके बालक आत्मनिर्भर बन सके तथा बेरोजगारी से मुक्त हो।
(2) सांस्कृतिक उद्देश्य: गांधीजी ने संस्कृति को शिक्षा का आधार माना। उनके अनुसार मानव के व्यवहार में संस्कृति परिलक्षित होनी चाहिए।
(3) पूर्ण विकास का उद्देश्य: उनके अनुसार सच्ची शिक्षा वह है जिसके द्वारा बालकों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास हो सके।
(4) नैतिक अथवा चारित्रिक विकास:गांधीजी ने चारित्रिक एवं नैतिक विकास को शिक्षा का उचित आधार माना है।
(5) मुक्ति का उद्देश्य: गांधीजी का आदर्श ”सा विधा या विमुक्तये” अर्थात शिक्षा ही हमें समस्त बंधनों से मुक्ति दिलाती है। अत: गांधीजी शिक्षा के द्वारा आत्मविकास के लिये आध्यात्मिक स्वतंत्रता देना चाहते थे। शिक्षा के सर्वोच्च उद्देश्य के अंतर्गत वे सत्य अथवा ईश्वर की प्राप्ति पर बल देते थे। अत: मनुष्य का अंतिम एवं सर्वोच्च उद्देश्य आत्मानुभूति करना है।

गांधीजी की बेसिक अथवा बुनियादी शिक्षा
अविनाशलिंगम के शब्दों में ”बुनियादी शिक्षा हमारे राष््ट्रपिता का अंतिम और संभवत: महानतम् उपहार है।”
सन् 1937 में गांधीजी ने वर्धा में हो रहे ‘अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन’ जिसे ‘वर्धा शिक्षा सम्मेलन’ कहा गया था। उसमें अपनी बेसिक शिक्षा की नयी योजना को प्रस्तुत किया जो कि मेट्रिक स्तर तक अंग्रेजी रहित तथा उद्योगों पर आधारित थी। जामिया मिलिया के तत्कालिक प्रिंसिपल डॉ.जाकिर हुसैन की अध्यक्षता में ‘जाकिर हुसैन समिति’ का निर्माण किया गया तथा गांधीजी के शिक्षा संबंधी विद्यायें तथा सम्मेलन द्वारा पारित किये गये प्रस्तावों के आधार पर ‘नई तालिम’ (बुनियादी शिक्षा) की योजना तैयार की गई। तथा 1938 में हरिपुर के अधिवेशन ने इन रिपोर्ट को स्वीकृति दी जो कि ‘वर्धा-शिक्षा-योजना’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ और बुनियादी शिक्षा का आधार है।

बापू की बुनियादी शिक्षा की विशेषताएं
(1) बेसिक शिक्षा के पाठ्यक्रम की अवधि 7 वर्ष की है।
(2) 7 से 14 वर्ष के बालकों एवं बालिकाओं को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा दी जाए।
(3) शिक्षा का माध्यम मातृभाषा है। हिंदी भाषा का अध्ययन बालकों तथा बालिकाओं के लिए अनिवार्य है।
(4) संपूर्ण शिक्षा का संबंध आधारभूत शिल्प (ठेंपब ब्तंजि) से होता है।
(5) चुने हुए शिल्प की शिक्षा देकर अच्छा शिल्पी बनाकर स्वावलम्बी बनाया जाए।
(6) शिल्प की शिक्षा इस प्रकार दी जाए कि बालक उसके सामाजिक एवं वैज्ञानिक महत्व को समझ सके।
(7) शारीरिक श्रम को महत्व दिया गया ताकि सीखे हुए शिल्प के द्वारा जीविकोपार्जन कर सके।
(8) शिक्षा बालकों के जीवन, घर, ग्राम तथा ग्रामीण उद्योगों, हस्तशिल्पों और व्यवसाय घनिष्ट रूप से संबंधित हों।
(9) बालकों द्वारा बनाई गई वस्तुएं जिनका प्रयोग कर सके एवं उनको बेचकर विद्यालय के ऊपर कुछ व्यय कर सकें।
(10) बालकों एवं बालिकाओं का समान पाठ्यक्रम रखा जाए।
(11) छठवीं और सातवीं कक्षाओं में बालिकाएं आधारभूत शिल्प के स्थान पर गृहविज्ञान ले सकती हैं।
(12) पाठ्यक्रम का स्तर वर्तमान मैट्रिक के समकक्ष हो।
(13) पाठ्यक्रम में अंग्रेजी और धर्म की शिक्षा नहीं दी गई है।

चूंकि बुनियादी शिक्षा राष्ट्रीय सभ्यता, संस्कृति के नजदीक थी,साथ ही साथ सामुदायिक जीवन के आधारभूत व्यवसायों से जुड़ी हुई थी तथा सीखे हुए आधारभूत शिल्प के द्वारा व्यक्ति अपने जीवन का निर्वाह कर सकता था। अत: यह शिक्षा हमारे जीवन के बुनियाद या आधार से जुड़ी हुई थी इसलिए इसका नाम बुनियादी या आधारभूत शिक्षा रखा गया। गांधीजी ने बुनियादी शिक्षा के पाठ्यक्रम के अंतर्गत आधारभूत शिल्प जैस कृषि, कताई-बुनाई, लकड़ी, चमड़े, मिट्टी का काम, पुस्तक कला, मछली पालन, फल व सब्जी की बागवानी, बालिकाओं हेतु गृह विज्ञान तथा स्थानीय एवं भौगोलिक आवश्यकताओं के अनुकूल शिक्षाप्रद हस्तशिल्प इसके अलावा मातृभाषा, गणित, सामाजिक अध्ययन एवं सामान्य विज्ञान, कला, हिंदी, शारीरिक शिक्षा आदि रखा। शिक्षण विधि को शिक्षण का वास्तविक कार्य-क्रियाओं और अनुभवों पर अनिवार्य रूप से आधारित किया।

गांधी जी के बारे में 10 रोचक तथ्य

महात्मा गांधी को भारत का राष्ट्र्रपिता भी कहा जाता है। देश को स्वतंत्रता दिलवाने में महात्मा गांधी की विशेष भूमिका रही है। गांधी जी के पिता का नाम करमचंद गांधी था जो कि राजकोट के दीवान थे और इनकी माता का नाम पुतलीबाई था। गांधीजी ने स्वतंत्रता के लिए हमेशा सत्य और अहिंसा का मार्ग चुना और कई आंदोलन किए। 30 जनवरी को गांधी जी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसलिए हर वर्ष भारत में 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है।
1. गांधीजी की मातृ-भाषा गुजराती थी।
2. गांधीजी ने अल्फ्रेड हाई स्कूल, राजकोट से पढ़ाई की थी।
3. गांधीजी का जन्मदिन 2 अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय अंहिसा दिवस के रूप मे विश्वभर में मनाया जाता है।
4. वह अपने माता-पिता के सबसे छोटी संतान थे उनके दो भाई और एक बहन थी।
5. गांधीजी के पिता धार्मिक रूप से हिंदू तथा जाति से मोध बनिया थे।
6. माधव देसाई, गांधीजी के निजी सचिव थे।
7. गांधीजी की हत्या बिरला भवन के बगीचे में हुई थी।
8. गांधीजी और प्रसिद्ध लेखक लियो टोलस्टोय के बीच लगातार पत्र व्यवहार होता था।
9. गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह संघर्ष के दौरान जोहांसबर्ग से 21 मील दूर एक 1100 एकड़ की छोटी सी कॉलोनी, टॉलस्टॉय फार्म स्थापित की थी।
10. गांधीजी का जन्म शुक्रवार को हुआ था, भारत को स्वतंत्रता शुक्रवार को ही मिली थी तथा गांधी जी की हत्या भी शुक्रवार को ही हुई थी।