Mon. Oct 21st, 2019

महात्मा गांधी के सिद्धांतों के पीछे सहकारिता ही मूलभाव

गांधीवाद युगों-युगों तक प्रासांगिक

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 2 अक्टूबर। सहकारिता रजिस्ट्रार डॉ. नीरज के. पवन ने कहा कि महात्मा गांधी जी के सहअस्तित्व, सद्भाव जैसे सभी सिद्धातों के पीछे सहकारिता की मूल भावना छिपी हुई है। उन्होंने कहा कि गांधी के सार्वजनिक जीवन में उनके आदर्श, उनकी सीख ही हमारे एवं समाज के लिए प्रेरक है। महात्मा गांधी के आदर्श वर्तमान समय की जरूरत है। गांधी के विचार अथाह समुद्र है, जिनके कारण देश विनीत भाव से उनको राष्ट्रपिता की संज्ञा देता है। डॉ. पवन सहकार भवन में महात्मा गांधी के 150वीं जयन्ती वर्ष के उपलक्ष्य में सत्य के साथ मेरे प्रयोग विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के मूल्य और उनका जीवन दर्शन आज भी प्रासांगिक है तथा उन्होंने हरिजन जैसा शब्द देकर समाज में समरसता एवं सौहार्द्र को स्थापित करने प्रयास किया। राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर बीएम शर्मा ने कहा कि गांधी जी ने अपने जीवन में पांच आश्रम स्थापित किए, जो सहकारिता के उत्कृष्ट उदहारण है। राजस्थान विश्वविद्यालय के महात्मा गांधी अध्ययन केन्द्र के निदेशक, डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी की यह देन है कि सत्य एवं अहिंसा के उनके सफल प्रयोगों के बदौलत ही आज विश्व भारत की ओर देख रहा है। संयुक्त रजिस्ट्रार, सहकारिता (नियम) विवेकानन्द यादव ने कहा कि सत्य के साथ मेरे प्रयोग विश्व की उत्कृष्ट आत्मकथा है, जिसमें अपने उजले एवं अंधेरे दोनों पक्षों को पूरी प्रमाणिकता के साथ गांधी जी ने लिखा है।