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मिलावटखोरों के प्रति सख्त रवैया अपनाने के मूड में गहलोत

विशेष संवाददाता
जयपुर, 19 नवंबर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मिलावटखोरों के प्रति सख्त रवैया अपनाने का संकेत दिया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार को मिलावटखोरों के लिए फांसी की सजा का कानून बनाना चाहिए। गहलोत अपने पूर्व के दो शासनकाल में भी मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चला चुके है। उनके ऐसे अभियानों की देश भर में सराहना भी हुई थी। इसके चलते प्रदेश में मिलावटियों की गतिविधियों पर भी अंकुश लगा था।
प्रदेश में खाद्य वस्तुओं में मिलावट की बढ़ती प्रवृति से आम आदमी के स्वास्थ पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। मुख्यमंत्री गहलोत सामाजिक सरोकारों के प्रति हमेशा सचेत रहते है। उन्होंने अपने पिछले शासन काल में शुद्व के खिलाफ युद्व अभियान चलाया था और उसमें खासी सफलता भी हासिल की थी। उस समय अभियान के कारण मिलावटखोरों में हडकंप मच गया था।

लगातार मिल रही हैं शिकायतें
इस बार भी उन्होंने इसी तरह का रवैया अपनाने का वादा किया है। गहलोत का कहना है कि मिलावट के खिलाफ निरंतर अभियान चलता रहना चाहिए। गहलोत ने अजमेर दौरे के दौरान भी साफ तौर पर कहा कि मिलावट एक तरह से आम आदमी के जीवन के साथ खिलवाड है। उनका कहना है कि मिलावटखोरी की लगातार शिकायतें मिल रही है। इसको लेकर संबंधित विभाग कार्रवाई भी कर रहे है। मिलावटखोरों के प्रति सख्त कार्रवाई के लिए उनकी सरकार पूरी तरह से प्रयासरत है। उनका कहना है कि हम चाहते है कि केंद्र सरकार मिलावटखोरों के लिए फांसी की सजा का कानून बनायें ताकि आम आदमी को राहत मिल सकें और उसका स्वास्थ्य खराब नहीं हो। गहलोत का मानना है कि स्वास्थ्य के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ मिलावटखोरी है। इसकी वजह से मानव शरीर को नुकसान पहुंचता है और गंभीर बीमारियों की जकड़ में लोग आते हैं। गहलोत ने अपनी मंशा जताते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि लोगों का स्वास्थ बेहतर हो। इसके लिए सरकार कई तरह के अभियान भी चलाती है। गौरतलब है कि स्वास्थ के क्षेत्र में गहलोत हमेशा संवेदनशील रहे है। उनके पहले ही कार्यकाल में स्वास्थ के लिए कई योजनाएं अमल में लाई गई थी। उन्होंने अपनी पिछली सरकार में तो निशुल्क दवा और जांच योजना को लागू कर देश भर में सराहना हासिल की थी। इस बार शासन संभालते ही उन्होंने इस योजना को फिर से दमदार तरीके से लागू कर दिया। इस बार इस योजना में गंभीर बीमारियों की दवाओं को भी दायरे में लाया गया है। निशुल्क दवा योजना में इस साल राजस्थान देश भर में अव्वल भी रहा है।