October 20, 2020

मुनाफाभरी है पीली सरसों की खेती

किसानों के लिए कृषि दिन पर दिन घाटे का सौदा साबित होती जा रही है। कुछ ऐसे बड़े किसान हैं, जो खेती के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं, लेकिन छोटे किसानों की हालत खराब है। उन्हें मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं मिल पा रही है। हाल के दिनों में कई किसानों ने पीली सरसों की खेती की है, जिससे अच्छी कमाई हो रही है। आप भी पीली सरसों की खेती कर अच्छी कमाई कर सकते हैं। पीली सरसों की खेती खरीफ और रबी के मध्य में की जाती है। इसकी खेती पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और गुजरात में अधिक होती है। इन राज्यों के किसान पीली सरसों की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं। अगर सही से इसकी खेती की जाए, तो किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है।

खेत की तैयारी
पीली सरसों की खेती करने के लिए किसानों को पहले अच्छे तरीके से खेत को तैयार करना चाहिए। इसके लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करना चाहिए। इसके बाद 2-3 जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करके पाटा देकर मिट्टी भुरभुरी कर लेनी चाहिए।

पीली सरसों की उन्नत किस्में
यूं तो पीली सरसों की कई किस्में मौजूद हैं। लेकिन इनमें से तीन पीतांबरी, नरेंद्र सरसों-2 और के-88 उन्नत किस्में मानी जाती हैं। पीतांबरी सरसों के पकनी की अवधि 110 से 115 दिन है, जबकि नरेंद्र सरसों-2 125 से 130 दिन और के-88 125 से 130 दिन है। वहीं, अगर बात करें इनमें तेल प्रतिशत का तो पीतांबरी में 42 से 43 फीसदी, नरेंद्र सरसों-2 में 44 से 45 फीसदी और के-88 में 42 से 43 फीसदी तेल होता है।

बुआई और सिंचाई
पीली सरसों की बुआई 15 सितंबर से 30 सितंबर तक कर लेनी चाहिए। बुआई देशी हल से करना लाभदायक होता है। बुआई 30 सेमी की दूरी पर 3 से 4 सेमी की गहराई पर कतारों में करना चाहिए। साथ ही पाटा लगाकर बीज को ढक देना चाहिए। सरसों की फसल में पहली सिंचाई फूल आने के समय और दूसरी सिंचाई फलियां में दाने भरने की अवस्था में करनी चाहिए। वहीं, अगर ठंड में बारिश हो जाती है, तो दूसरी सिंचाई नहीं भी करेंगे तो चल जाएगा।

20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन
अगर सब कुछ सही रहा, तो पीतांबरी किस्मों से 18 से 20 क्विंटल, नरेंद्र सरसों-2 से 16 से 20 क्विंटल और के-88 से 16 से 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होगा।