November 24, 2020

मुस्लिम वोटों पर नजर

कांग्रेस-भाजपा ने बदले दांव पेंच

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 21 अक्टूबर। राजधानी के दोनों नगर निगमों में इस बार बड़ी संख्या में मुस्लिम प्रत्याशी भी नजर आ रहे हैं। जयपुर के मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस हमेशा से मुस्लिम चेहरों को मौका देती आई है लेकिन नगर निगम चुनाव के इतिहास में यह पहला मौका है जब बीजेपी ने भी 19 मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारकर कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास किया है। कांग्रेस के 34 और बीजेपी के 19 मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में होने से अब मुस्लिम बहुल वार्डों में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। टिकट वितरण की बिसात बिछाने के बाद अब राजधानी जयपुर में दो नगर निगम चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। दोनों ही दलों ने इस बार एक एक वार्ड में जीत हासिल करने के लिए रणनीति तैयार की है।
बीजेपी ने अपनी रणनीति के विपरीत जाकर इस बार मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए बड़ी संख्या में मुस्लिम प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में उतारे हैं। जयपुर में जहां कांग्रेस ने 34 तो बीजेपी ने 19 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया है। अंतिम समय पर बीजेपी की इस नई रणनीति से कांग्रेस के खेमे में परेशानी नजर आ रही है। बीजेपी के नेता अपनी रणनीति को सबका साथ सबका विकास और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात कह रहे हैं तो वहीं कांग्रेस के नेताओं ने बीजेपी को अवसर लपकने वाली पार्टी करार दिया है। दरअसल जयपुर हेरिटेज और जयपुर ग्रेटर नगर निगम के ढाई सौ वार्डों के लिए हो रहे चुनाव में कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी की नजर भी अल्पसंख्यक वोटों पर है। कांग्रेस ने हेरिटेज नगर निगम में 30 मुस्लिमों को टिकट दिया है तो वहीं बीजेपी ने 17 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। इसके अलावा जयपुर ग्रेटर निगम में कांग्रेस ने 4 और बीजेपी ने 2 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे हैं।
कांग्रेस ने सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक उम्मीदवार हवामहल विधानसभा क्षेत्र में उतारे हैं। यहां 12 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है । इसके बाद किशनपोल में 8, आदर्श नगर में 7, सिविल लाइंस में दो, बगरू में 1, विद्याधर नगर में 3 और आमेर में एक मुस्लिम प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है। हालांकि कांग्रेस ने मालवीय नगर और सांगानेर में एक भी अल्पसंख्यक उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अंतिम समय पर बीजेपी की ओर से इस बदली रणनीति के तहत अब कांग्रेस को उन मुस्लिम बहुल वार्डों में और अधिक प्रचार करना होगा मेहनत करनी होगी जहां वे अपनी जीत सुनिश्चित मान रहे थे।

जयपुर में 2-2 वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस का नामांकन ही नहीं
उधर नगर निगम चुनाव में नामांकन के अंतिम दौर में सोमवार को टिकटों के लिये मची आपाधापी में कांग्रेस और बीजेपी जयपुर में दो-दो वार्डों में नामांकन ही नहीं भर पाई है। दोनों ही पार्टियां इन वार्डों के लिये विचार विमर्श में डूबी है। वहीं टिकट नहीं मिलने से नाराज चल रहे कार्यकर्ताओं और बागी प्रत्याशियों की मान मनौव्वल का दौर भी शुरू हो गया। 22 अक्टूबर तक नाम वापस लिये जा सकते हैं। लिहाजा दोनों पार्टियों के नेता डेमेज कंट्रोल में जुट गये हैं। कांग्रेस खेमे से सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि बागियों को मनाया जाएगा। जिन्होंने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर नामांकन कर दिया उन्हें पार्टी मनाएगी। जोशी ने कहा कि हवामहल क्षेत्र में सबसे कम बागी हैं फिर भी हवामहल हो या अन्य जगह जो कार्यकर्ता नाराज हैं उन्हें मनाया जाएगा।

जिस नेता का समर्थक वही मनाए
कांग्रेस में विधायकों और हारे हुये विधायक उम्मीदवारों को बागियों और नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने का जिम्मा दिया गया है। जो बागी जिस नेता का समर्थक है उस नेता को ही उसे मनाने की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस में जयपुर में परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास और मुख्य सचेतक महेश जोशी बागियों को मनाने के लिये सक्रिय हो गये हैं। कई बागियों को राजनीतिक नियुक्तियों का लॉलीपॉप दिया जा रहा है।

बीजेपी को लगाना पड़ेगा ऐड़ी से चोटी का जोर
वहीं बीजेपी ने बागियों को मनाने के लिये अपने नेताओं का जिम्मेदारी दे दी है। बीजेपी खेमे में भी बगावत का झंडा बुलंद है। पार्टी नेता अपने-अपने समर्थकों को मनाने में जुटे हैं। चूंकि अभी बीजेपी विपक्ष में है, लिहाजा उसे कार्यकर्ताओं को मनाने के लिये ऐड़ी से चोटी तक का जोर लगाना पड़ेगा क्योंकि उसके पास राजनीतिक नियुक्ति या फिर अन्य किसी सरकारी लाभ देने का फिलहाल कोई साधन नहीं है।