September 25, 2020

मैं हूं जैसलमेर… और यह है मेरा सोनार किला…

पश्चिमी राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर स्थित जैसलमेर का स्वर्णिम इतिहास किसी से छिपा नहीं है। जैसलमेर आज स्वर्णनगरी के नाम से अपनी आभा विश्व में फैला रहा है। अनूठी कला और वास्तुकला तथा संस्कृति के चलते यह आज देश-दुनिया में एक बेहद खास ट्यूरिस्ट स्पॉट बन चुका है। यहां का सोनार किला अद्भुत है। राजस्थान के प्रसिद्ध मरू शहर जैसलमेर की स्थापना 1156 ई. में भाटी राजा जैसल ने की थी। यहां का सोनार किला राजस्थान के श्रेष्ठ धान्वन दुर्गों में माना जाता है। इसका निर्माण 1156 में किया गया था और यह राजस्थान का दूसरा सबसे पुराना किला है। ढाई सौ फीट ऊंचा और सेंट स्टोन के विशाल खण्डों से निर्मित 30 फीट ऊंची दीवार वाले इस किले में 99 प्राचीर हैं। इनमें से 92 का निर्माण 1633 और 1647 के बीच कराया गया था। इसमें बनाये गये झरोखे वास्तुकला का अनूठा नमूना है। दिन के समय सूरज की रोशनी में इस किले की दीवारे हल्के सुनहरे रंग की दिखती है। इसी कारण से यह किला सोनार किला या गोल्डन फोर्ट के नाम से भी जाना जाता ह। यह किला शहर के बीचों बीच बना हुआ है। इस किले में कई संकरी गलियां और चार विशाल प्रवेश द्वार हैं। इनमें से अंतिम एक द्वार मुख्य चौक की ओर जाता है। इस पर महाराज का पुराना महल है। जैसलमेर शहर की लगभग एक चौथाई आबादी इसी किले के अंदर रहती है। यहां अखे पोल, गणेश पोल, सूरज पोल, और हवा पोल के जरिए पहुंचा जा सकता है। किले में महारानी का महल। इसे अब म्यूजियम बना दिया गया है।