September 22, 2020

मोटापे के लिए भी खतरनाक है कोरोना

अमेरिका के जॉन प्लेस की उम्र 43 साल है और वजन 112 किलो है। जून में जॉन को कोरोना का संक्रमण हुआ और आईसीयू में भर्ती किया गया। मोटापे के कारण डॉक्टरों ने इनकी बचने सम्भावना 20 फीसदी ही जताई थी। काफी इलाज के बाद जॉन रिकवर तो हुए लेकिन शरीर में हो रहा दर्द अभी भी परेशान कर रहा है।
दुनियाभर के कई देशों में हुई रिसर्च कहती है, मोटे लोगों को कोरोना 3 तरह से परेशान करता है। पहला, इनमें संक्रमण होने का खतरा ज्यादा है। दूसरा, इनमें संक्रमण होने पर ज्यादातर मामलों में हालत नाजुक हो जाती है। तीसरा, अगर ये मोटापे के अलावा डायबिटीज या हार्ट डिसीज से जूझ रहे हैं तो केस और बिगड़ता है। अधिक वजन वाले लोगों में कोरोना का संक्रमण जल्दी क्यों होता है, दूसरे मरीजों के मुकाबले हालत नाजुक क्यों हो जाती है क्यों इनमें कोविड-19 से लडऩे की क्षमता घट जाती है।

बेकाबू हो जाता है रोगों से लडऩे वाला इम्यून सिस्टम
इंटरनेशनल मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन एंडोक्राइन सोसायटी के जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, मोटापा कोरोना से लडऩा मुश्किल कर देता है। ऐसे लोगों में ज्यादातर संक्रमण के बाद इम्यून सिस्टम बेकाबू हो जाता है। यानी शरीर को बचाने वाला सिस्टम ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है। विज्ञान की भाषा में इसे साइटोकाइन स्टॉर्म कहते हैं। मोटापे के कारण डायबिटीज, हार्ट और किडनी डिसीज को बढ़ावा मिलता है, जिसका असर शरीर में रोगों से लडऩे वाले इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। अगर मोटापे के अलावा किसी और भी बीमारी से जूझ रहे हैं और संक्रमण के बाद चुनौती बढ़ जाती है।