November 30, 2020

मौसम सर्द, गुपकार के बहाने सियासत गर्म…

जम्मू,10 नवम्बर (एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर की फिजा कुछ बदली-बदली सी है। मौसम सर्द हो चला है और सियासत गर्म। राजनीति का अखाड़ा इन दिनों जम्मू बना हुआ है और सियासत के धुरंधर आरोपों-प्रत्यारोपों के रथ पर सवार। अनुच्छेद 370, गुपकार, राष्ट्रवाद और पाकिस्तान-चीन का नाम लेकर तीखे बाण चलाए जा रहे हैं और जनता चुपचाप विश्लेषक की भांति सब पर निगाह बनाए हुए।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला व उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग जम्मू में ही हैं। कश्मीर में रहकर विवादित बयान देने वाले कश्मीर के नेता जम्मू में देशभक्ति और भावनात्मक मुद्दे उछालकर अपनी सियासी जमीन तलाशते नजर आए। वहीं भाजपा राष्ट्रवाद को हथियार बनाकर उनके तमाम सियासी बाणों की काट ढूंढते दिखाई दिए। कश्मीरी नेताओं को भी इस बात का अहसास है कि जम्मू के समर्थन के बिना उनके लिए भी जम्मू-कश्मीर की सत्ता पर काबिज होना संभव नहीं। यही कारण है कि महबूबा, फारूक और उमर के सुर बदले नजर आए। वे भाजपा पर तो जमकर बरसे, लेकिन यह संदेश देने का भी प्रयास किया कि जम्मू और कश्मीर दोनों एक है।
महबूबा ने कहा कि कश्मीर के साथ-साथ जम्मू की पहचान को भी खत्म किया जा रहा है। इसके साथ उन्होंने जम्मू के लोगों के साथ रिश्ता जोडऩेे का भी पूरा प्रयास किया। वहीं डॉ. फारूक ने भी लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की कि अगर आज जम्मू-कश्मीर भारत के साथ है तो यह उनकी पार्टी के कारण ही है। दरअसल, दोनों दलों के नेता जम्मू में होने वाली पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डेक्लेरेशन की बैठक से पहले अपने-अपने कार्यकर्ताओं के अलावा जम्मू के लोगों का मिजाज भी भांप रहे थे।

भाजपा के तेवर बरकरार
इस बीच, भाजपा ने अपने तेवर बरकरार रखे। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने भी कार्यकर्ताओं से कहा कि हमको राष्ट्र विरोधी ताकतों का मुकाबला करना है। हमें तिरंगे को बुलंद कर जनता को देश विरोधी एजेंडे से पर्दा उठाना है। पीपुल्स एलायंस के जवाब में भाजपा शनिवार को बैठक करने जा रही है। ऐसे में पूरी उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अभी सियासी पारा और चढ़ेगा।