September 25, 2020

ये उपाय करने से मिलता है पितरों का आशीर्वाद

श्राद्ध पक्ष कल से

पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष 16 दिन की अवधि है। इसमें सनातन धर्म के लोग अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और उनके लिए पिंडदान करते हैं। पितृपक्ष को लेकर यह भी मान्यता है कि अगर इस समय पितरों को प्रसन्न कर लिया जाए तो घर-परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। इसके अलावा जातक और उसके परिवार पर कोई भी बुरा साया या फिर दु:ख-तकलीफ नहीं आती। बता दें कि इस बार पितृपक्ष 2 सितंबर से 17 सितंबर तक है। ऐसे में आप यहां बताये गए इन उपायों को अपनाकर अपने पूर्वजों का आशीर्वाद और उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
पूर्णिमा श्राद्ध 2 सितंबर को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा को पूर्णिमा श्राद्ध होता है। पूर्णिमा के बाद प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या श्राद्ध आता है। इन तिथियों में पूर्णिमा श्राद्ध, पंचमी, एकादशी और सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध प्रमुख माना जाता है।

पूर्णिमा तिथि और समय
पितृपक्ष का आगमन राहु के नक्षत्र शतभिषा में हो रहा है और राहु के नक्षत्र में इस पक्ष का आरम्भ होना ज्योतिष की नजर में बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। पूर्णिमा तिथि 1 सितंबर को सुबह 9:38 बजे से शुरू होगी, जो 2 सितंबर को सुबह 10:53 बजे तक रहेगी।

जानें पूर्णिमा श्राद्ध विधि और कैसे पाएं आशीर्वाद  
शास्त्रों के अनुसार, जो हमारे पूर्वज पूर्णिमा के दिन चले गए हैं उनके पूर्णिमा श्राद्ध ऋषियों को समर्पित होता है। हमारे पूर्वज जिनकी वजह से हमारा गोत्र है। उनके निमित तर्पण करवाएं। अपने दिवंगत की तस्वीर को सामने रखें। उन्हें चन्दन की माला अर्पित करें और सफेद चन्दन का तिलक करें। इस दिन पितरों को खीर अर्पित करें। गाय के गोबर के उपले में अग्नि प्रज्वलित कर अपने पितरों के निमित तीन पिंड बना कर आहुति दें। इसके बाद, कौआ, गाय और कुत्तों के लिए प्रसाद खिलाएं। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और स्वयं भी भोजन करें।

पूर्णिमा का महत्व
इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से व्यक्ति को धन-धान्य की कमी नहीं रहती है। जो लोग पूर्णिमा के दिन व्रत करते हैं, उनके घर में सब प्रकार से सुख-समृद्धि का वास होता है। सारें कष्ट दूर होते हैं। इस दिन उमा-महेश्वर व्रत भी रखा जाता है। माना जाता है कि भगवान सत्यनारायण नें भी इस व्रत को किया था। इस दिन दान-स्नान का भी बहुत महत्व माना गया है। भादप्रद पूर्णिमा के दिन को इसलिए भी खास माना गया है क्योंकि इस दिन से श्राद्ध पक्ष का आरंभ होता है, और सोलह दिनों तक अपने पितरों से आशीर्वाद प्राप्त करने के दिन होते हैं।

नाम पर प्याऊ बनवाएं
पितृ पक्ष में कौओं को खाना जरूर खिलाएं। इसके अलावा कभी भी पितरों की जयंती और बरसी मनाना न भूलें। इस दिन घर पर कोई न कोई पूजा जरूर रखें। साथ ही उनकी याद में भोजन और मिठाई बांटे। इससे परिवारा पर उनकी कृपा हमेशा ही बनी रहती है। इसके अलावा पितरों को प्रसन्न करने के लिए आप उनके नाम पर प्याऊ बनवाएं। मान्यता है कि इससे वह प्रसन्न होकर जातक को खुश रहने का आशीर्वाद देते हैं।

जरूरतमंदों को करें दान
पितृ पक्ष के दौरान ही अपने पितरों के नाम पर शमशान में बैठने की व्यवस्था करवाएं। आप चाहें तो कोई चबूतरा बनवा सकते हैं। या अगर कोई ऐसा बैठने का स्थान हो जहां पर शेड न हो तो आप उस स्थान के ऊपर शेड डलवा सकते हैं। ऐसा करने से भी पितरों को प्रसन्नता होती है और वह परिवारीजनों को खुश रहने का आशीर्वाद देते हैं। इसके अलावा पितरों को प्रसन्न करने के लिए जरूरतमंदों को उनकी जरूरत के अनुसार वस्तुएं दान करें। कहते हैं कि इससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है और उनकी खुशी से जातक के जीवन में भी खुशियां आती हैं।