September 19, 2020

राजस्थान में मिली तितलियों की 2 नई प्रजातियां

बटरफ्लाई मंथ में मिली एक और सफलता

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 9 सितम्बर। पर्यावरण एवं जैव विविधता संरक्षण के लिए कार्य कर रहे दो पर्यावरण वैज्ञानिकों ने राजस्थान में तितलियों की दो नई प्रजातियों को ढूंढने में सफलता प्राप्त की है। राजस्थान के ख्यातनाम पर्यावरण वैज्ञानिक और टाइगर वॉच के फील्ड बॉयोलोजिस्ट डॉ. धर्मेन्द्र खंडाल और दक्षिण राजस्थान में जैव विविधता संरक्षण के लिए कार्य कर रहे पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. सतीश शर्मा ने राज्य के सवाई माधोपुर के रणथम्भौर बाघ परियोजना क्षेत्र के बाहरी भाग में इन दो तितलियों की प्रजातियों को खोजा है। दरअसल इन दिनों देशभर में तितलियों को गिनने, समझने और संरक्षण की मुहिम को आमजन तक ले जाने के लिए तितली माह यानी बिग बटरफ्लाई मंथ चल रहा है। डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि रणथम्भौर बाघ परियोजना क्षेत्र के बाहरी भाग में राजस्थान की सुंदर तितलियों में शुमार दक्खन ट्राई कलर पाइड फ्लेट (कोलाडेलिया इन्द्राणी इन्द्रा) और स्पॉटेड स्माल फ्लेट (सारंगेसा पुरेन्द्र सती) नामक दो नई तितलियों को खोजा गया है। ये दोनों ही तितलियां हेसपेरीडी कुल की सदस्य हैं।

इन्द्राणी इन्द्रा तितली के पंखों की ऊपरी सतह सुनहरी पीले रंग की
डॉ. शर्मा ने बताया कि कोलाडेनिया इन्द्राणी इन्द्रा तितली के पंखों की उपरी सतह सुनहरी पीले रंग की होती है। इस पर पहली जोड़ी पंखों के बाहरी कोर पर काले बॉर्डर वाले चार-चार अर्द्ध पारदर्शक सफेद धब्बे होते हैं। दो-दो अन्य छोटे-छोटे धब्बे भी विद्यमान रहते हैं। पिछली जोड़ी पंखों पर काले धब्बे होते हैं। इस तितली का धड़, पेट व टांगें पीली और आंखें काली होती हैं। पंखों के कोर काले होते हैं जिनमें थोड़े-थोड़े अंतरालों पर सफेद धब्बे होते हैं। पिछले पंखों पर सफेद धब्बे ज्यादा होते है। यह तितली बंगाल, केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तरी-पूर्वी भारत, छतीसगढ़, जम्मू एवं कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तराखण्ड में पायी जाती है। इस खोज के बाद राजस्थान भी अब इसके वितरण क्षेत्र में जुड़ गया है।

भूरे-काले रंग की पुरेन्द्र सती तितली बेहद आकर्षक
डॉ. शर्मा ने बताया कि सारंगेसा पुरेन्द्र सती नामक तितली भूरे-काले रंग पर सफेद धब्बों के बिखरे पैटर्न से बहुत आकर्षक लगती हैं. इसकी श्रृगिकाएं सफेद रंग की लेकिन शीर्ष कालापन लिए होता है। यह तितली गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और उत्तराखंड में मिलती है। वर्तमान में यह तितली सवाई माधोपुर, करौली, बूंदी व टोंक जिलों में विद्यमान है। डॉ. खांडल ने बताया कि दोनों तितलियों की गतिविधियां देखने के लिए बारिश का समय उपयुक्त है। यहां ट्राईडेक्स प्रोकम्बैन्स, लेपिडागेथिस क्रिस्टाटा, लेपिडागेथिस हेमिल्टोनियाना आदि पौधे है जहां इनके मिलने की संभावना अधिक है। इन नई तितलियों का शोध रिकॉर्ड इंडियन जनरल ऑफ एनवायरमेंटल साइंस के अंक 24 (2) में प्रकाशित हुआ है।