October 25, 2020

राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की बैठक में अहम निर्णय

  • मकानों की बकाया किश्त जमा करवाने पर ब्याज-पेनल्टी में मिलेगी छूट
  • वर्ष 2001 से पूर्व के आवंटियों को भी मिलेगा लाभ

जयपुर, 22 सितंबर। राजस्थान आवासन मण्डल के पूर्व आवंटियों को बड़ी राहत देते हुए बकाया किश्तों अथवा आवास की राशि एक मुश्त जमा करवाने पर ब्याज-पेनल्टी में छूट दी है। इस छूट का लाभ वर्ष 2001 से पहले के आवंटियों को भी मिलेगा। हाउसिंग बोर्ड में कल मंडल अध्यक्ष भास्कर ए. सावंत की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया।
आवासन मण्डल आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि वर्तमान में वैश्विक महामारी के कारण उत्पन्न संकट की स्थिति को देखते हुए बोर्ड प्रशासन ने 1 जनवरी 2001 से पूर्व के आवंटित समस्त आवासों के आवंटियों को बकाया मासिक किश्तों की राशि एकमुश्त जमा करवाने पर ईडब्लूएस, एलआईजी, एमआईजी ‘ए’ श्रेणी के आवेदकों को ब्याज एवं शास्ति में शत प्रतिशत छूट तथा एमआईजी ‘बीÓ व एचआईजी श्रेणी के आवेदकों को ब्याज एवं शास्ति में 50 प्रतिशत की छूट देने का अहम निर्णय किया है। उन्होने बताया कि अब तक केवल 1 जनवरी, 2001 से बाद के आवंटियों को ही छूट दी जा रही है। उन्होने बताया कि यह छूट 31 दिसम्बर 2020 तक प्रभावी रहेगी।

अखिल भारतीय सेवा के अफसरों के लिए बनेगी योजना
आयुक्त ने बताया कि मंडल की ओर से जयपुर के प्रताप नगर सेक्टर 17 में अखिल भारतीय सेवाओं (आईएएस, आईपीएस एवं आईएफएस) के राजस्थान संवर्ग के अधिकारियों के लिए ‘एआईएस रेजीडेन्सी’ आवासीय योजना सृजित की है। यह योजना स्ववित्त पोषित योजना होगी। इस योजना में 192 बहुमंजिला फ्लैट बनाए जाएंगे। एक फ्लैट का निर्मित क्षेत्रफल 3,211 वर्ग फीट होगा। यह फ्लैट 3 बीएचके होगा, जिसमें एक ड्राइंग रूम और एक सर्वेन्ट रूम भी बनाया जाएगा। एक फ्लैट की अनुमानित लागत लगभग 91 लाख 58 हजार रुपए होगी।

जल्द लांच होगी ‘अपनी दुकान-अपना व्यवसाय’ योजना
आयुक्त ने बताया कि स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मंडल की ओर से 2 अक्टूबर को ‘अपनी दुकान-अपना व्यवसाय’ योजना लांच की जाएगी। इस योजना के तहत लगभग 1544 व्यावसायिक भूखंड या निर्मित दुकानें, जो 27 वर्गमीटर तक के आकार की हैं, उन्हें ई-बिड सबमिशन के माध्यम से बेचा जाएगा और जिन 137 दुकानों या भूखंडों का आकार 27 वर्गमीटर से अधिक है, उनका निस्तारण ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा। इस तरह 1681 व्यावसायिक भूखंडों या निर्मित दुकानों का निस्तारण इस योजना के तहत किया जाएगा।