October 20, 2020

राज्य निर्वाचन आयोग का ‘माइक्रो कोरोना मैनेजमेंट’ बना बेमिसाल नजीर

  • पंचायत चुनाव के चार चरणों में 82.78 फीसदी मतदान
  • अब शहर जयपुर, जोधपुर और कोटा में उठाया सुरक्षित निकाय चुनाव करवाने का बीड़ा

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 13 अक्टूबर। कोरोना महामारी के बीच प्रदेश में हुए पंचायत चुनाव के चारों चरण सुरक्षित और सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। इन चरणों में प्रदेश के 82.78 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है। राजस्थान में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए कोरोना प्रबंधन दूसरे राज्यों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के सबसे ज्यादा संक्रमित जयपुर, जोधपुर और कोटा शहरों में नगर निगमों में सुरक्षित चुनाव का भी बीड़ा उठाया है। सामान्य हालात में हुए प्रथम चरण के चुनावों 83.85 प्रतिशत मतदान हुआ। कोरोना के संक्रमण के दौरान लग रहा था कि मतदाता मतदान के लिए घर से बाहर नहीं निकल पाएंगे लेकिन आयोग द्वारा कोरोना के तैयार माइक्रो मैनेजमेंट प्लान को देख न केवल मतदाता बाहर निकले बल्कि रिकॉर्ड 82.25 फीसदी मतदान कर साबित कर दिया कि आयोग द्वारा संक्रमण के नियंत्रण के लिए तैयार रणनीति उन्हें खासी रास आई है।

‘घूंघट में भी मास्क’ अनिवार्य
आयोग की मंशा थी कि कोई भी मतदाता बिना मास्क के मतदान केंद्रों में प्रवेश नहीं करे ताकि संक्रमण का प्रसार ना हो। मतदाताओं ने भी इस मंशा को बखूबी समझा और मास्क लगाकर ही मतदान केंद्रों पर पहुंचे। पहले चरण में आयोग को लगा कि पुरुष तो मास्क लगाकर आ रहे हैं लेकिन महिलाएं बतौर मास्क अपने पल्लू या आंचल को काम ले रही हैं। इससे संक्रमण की आशंका को देख अगले चरणों के लिए आयोग ने ‘घूंघट में भी मास्कÓ का नारा दिया। मतदाता सतर्क और सजग थे, आयोग के नारे को हाथों हाथ लिया।

कंट्रोल रूम बनाया पावरफुल
आयोग का मानना था कि चुनाव के दौरान किसी भी सूचना, शिकायत या सुझाव के लिए मतदाता को इधर-उधर भटकना ना पड़े। इसी के मद्देनजर उन्होंने सभी जिला कलक्टर्स को 24 गुणा 7 की तर्ज चलने वाले ‘एक्टिव’ कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय कंट्रोल रूम और क्षेत्र में आए पर्यवेक्षकों के नंबरों को प्रचारित-प्रसारित करने के भी निर्देश दिए। प्रदेश स्तर पर चार लाइनों के साथ कंट्रोल रूम चलाया गया, जहां चुनाव संबंधी पूछताछ और समस्याओं के समाधान के लिए विशेषज्ञ अधिकारियों को नियुक्त किया गया। इस दौरान सैंकड़ों लोगों ने न केवल मतदान संबंधी पूछताछ और शिकायत की, जिन्हें विशेषज्ञों की सलाह पर तुरंत समाधान भी किया गया।

संक्रमित को दिए मौका
इस बार के पंचायत चुनाव पर पूरे देश की नजर थी। आयोग ने कोरोना संक्रमित व्यक्ति को मतदान करने और उम्मीदवार बनने का मौका दिया। आयोग ने इसके लिए विशेष रणनीति बनाई और मेडिकल द्वारा सुझाए सभी प्रोटोकॉल की पालना के साथ सुरक्षित मतदान का मौका भी दिया। आयोग ने प्रचार के दौरान डोर टू डोर 5 व्यक्ति से ज्यादा नहीं जाने, प्रचार के दौरान मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए 2 गज की दूरी बनाने, प्रचार के समय हाथों को सेनेटाइज करने और हाथ ना मिलाने, गले ना लगने और ना ही पैर छूने के निर्देश दिए।

जागरूकता पर विशेष जोर
आयोग ने चुनाव के दौरान मतदाताओं को जागरूक करने के लिए राज्य स्तर के समाचार पत्रों में जागरूकता संबंधी विज्ञापन प्रसारित किए। इन विज्ञापनों में न केवल मतदाताओं के लिए कोरोना संबंधी जारी दिशा-निर्देशों को बखूबी समझाया गया बल्कि उम्मीदवार व उनके समर्थकों को भी कोरोना संबंधी सावधानियां बताई गई।

कम संसाधन, बेहतर प्रबंधन
आयोग ने न्यूनतम संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए पंचायत जैसे वृहद चुनावों को न केवल सफलतापूर्वक संपादित कर एक रिकॉर्ड भी बनाया। आयोग ने अफसरों की लंबी फौज के बजाय चंद अधिकारियों के दम पर चुनाव करवाकर यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों में भी कार्य करवाए जा सकते हैं।