October 23, 2020

रालोपा भी हुई खफा, तरेरी आंखें

कृषि बिलों पर एनडीए का एक और घटक दल नाराज

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 1 अक्टूबर। नए कृषि बिल पर अकाली दल के एनडीए से नाता तोडऩे के बाद उसका एक और घटक दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) भी इस बिल को लेकर खफा है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने चेतावनी दी कि वह इस बिल के मुद्दे पर किसानों के साथ खड़ी होगी। रालोपा के संयोजक नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि पार्टी की कोर कमेटी इस बिल की आपत्तियों पर विचार कर पार्टी रणनीति का फैसला करेगी। रालोपा एनडीए का हिस्सा रहने या न रहने पर भी पुनर्विचार कर सकती है।
रालोपा की आपत्ति ये है कि बिल को संसद में पेश करने से पहले सहयोगी दलों को विश्वास में नहीं लिया गया। बेनीवाल ने कहा कि रालोपा की आपत्ति बिल के दो प्रावधान को लेकर है। पहला तो ये कि मंडियों से बाहर खरीद में न्यूनतम समर्थन मूल्य की शर्त शामिल नहीं है। दूसरी आपत्ति ये कि निजी कंपनियों की किसान से खरीद में थर्ड पार्टी की भूमिका। बेनीवाल ने कहा कि वे प्रधानमंत्री से मिलकर इन आपत्तियों को बताएंगे। उसके बाद फैसला करेंगे। बेनीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी की मांग है कि निजी कंपनियों की खरीद फरोख्त में किसानों की सुरक्षा का भरोसा हो।
पार्टी का सबसे बड़ा वोट बैंक ही किसान है: बेनीवाल ने कहा कि जिस दिन संसद में बिल पेश हुए तब वे वहां मौजूद नहीं थे इसलिए उस समय न तो उनका इस बिल को समर्थन रहा न ही विरोध। रालोपा राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस के बाद बड़ी राजनीतिक ताकत है।