October 20, 2020

रेतीले धोरों में लगा डाले सेव, लिची और नारंगी के पेड़

मेहनती रिटायर्ड अधिकारी के प्रयास रंग लाए

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 22 सितम्बर। पश्चिमी राजस्थान में भारत-पाकिस्तान की सरहद पर स्थित बाड़मेर का जिक्र आते ही जेहन में रेत के समंदर में टापू सरीखे नजर आने वाले इलाके की तस्वीर उभरती है। हर दूसरे साल सूखा और अकाल को देखने वाले इसे इलाके में भी हिम्मत और जज्बे से धरती को हरितमा की चुनरी ओढ़ाई जा सकती है। इसे साबित कर दिखाया है एक रिटायर्ड मेहनतकश अधिकारी ने। इस अधिकारी ने 10 साल की मेहनत से अपने घर में एक बगीचा लगाया है। बगीचा आज सभी को हैरत में डाले हुए है। ये हैं सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी मूलाराम चौधरी। जिला मुख्यालय के बलदेव नगर में मूलाराम चौधरी ने अपने घर पर छोटा बगीचा तैयार किया है। चौधरी के इस बगीचे में जहां देखो वहां हरियाली ही हरियाली नजर आती है। ऊंचे-ऊंचे पेड़ और वह भी फलों से लदकद। चौधरी ने इस बगीचे को अपने पसीने से सींचा है। उन्होंने केवल खुद की मेहनत की बदौलत 10 साल में यह वाटिका तैयार की है। उन्होंने दस साल पहले बगीचे में फलदार पौधे लगाने शुरू किए थे। वे अब फलों से लदे नजर आ रहे हैं।

ये पेड़ महका रहे हैं बगीचे को
मूलाराम ने दस साल पहले बगीचे में नींबू, मौसमी, नारंगी, अनार,थाई सेव, पपीता, शहतूत, सहजन, लीची, सीताफल, अंजीर, अंगूर और कागजी नींबू के पौधे लगाये थे। चौधरी ने दिनरात मेहनत कर इन पौधों की नेचर के विपरीत जलवायु, मिट्टी और पानी के यह वाटिका तैयार कर डाली। इसके अलावा अशोक, बेलपत्र, बिजोरा, तुलसी, इलायची और गिलोय सहित कई देशी पौधे भी लगाए हुए हैं। चौधरी ने मूल रूप से किसान होने के कारण हमेशा खाली जगह पर बगीचा लगाने के लिए खाली समय में काम किया है।