Wed. Jul 17th, 2019

रेलवे का निजीकरण नहीं होगा: गोयल

अनुदानों की मांगों पर चर्चा का रेलमंत्री ने दिया जवाब

नई दिल्ली, 13 जुलाई (एजेंसी)। रेलवे के निजीकरण की विपक्ष की आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि रेलवे का कोई निजीकरण कर ही नहीं सकता और इसके निजीकरण का कोई मतलब भी नहीं हैÓ। लोकसभा में वर्ष 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर गुरुवार को देर रात तक चली चर्चा का शुक्रवार को जवाब देते हुए रेल मंत्री ने यह बात कही है। गोयल ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि निजी कंपनियों द्वारा परिचालन के लिए अभी तक किसी भी विशिष्ट यात्री गाड़ी की पहचान नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए नई ट्रेनों का सपना दिखाने के बजाय सरकार ने सुविधाएं एवं निवेश बढ़ाने के लिए पीपीपी आमंत्रित करने का इरादा किया है। उन्होंने कहा कि कोई सुविधा बढ़ाने, प्रौद्योगिकी लाने, नया स्टेशन बनाने, सेमी हाई स्पीड ट्रेन चलाने की बात करे तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

रेलवे में 2.94 लाख पदों को भरने की प्रक्रिया जारी
सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि इस साल एक जून तक रेलवे में 2.98 लाख पद रिक्त थे। इनमें से 2.94 लाख पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सदन को बताया कि पिछले एक दशक में रेलवे में 4.61 लाख से ज्यादा लोगों को नियुक्त किया गया। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों पर बहाली एक सतत प्रक्रिया है। मंत्री ने बताया कि 1991 में रेलवे में 16.54 लाख कर्मचारी थे जो 2019 में घटकर 12.48 लाख रह गए,लेकिन इससे रेलवे की सेवा पर कोई असर नहीं पड़ा है।

रायबरेली कोच फैक्ट्री की क्षमता 5,000 तक बढ़ाने का इरादा
गोयल ने कहा कि हम चाहते हैं रायबरेली कोच कारखाने की क्षमता प्रतिवर्ष 5,000 डिब्बे बनाने की हो। जिससे लोगों को नौकरियां मिले। पिछले सप्ताह लोकसभा में संप्रग अध्यक्ष सोनियां गांधी ने सरकार पर रेलवे की ‘बहुमूल्य संपत्तियों को निजी क्षेत्र के चंद हाथों को कौडिय़ों के दाम पर बेचने’ का आरोप लगाया था और इस बात पर अफसोस जताया था कि सरकार ने निगमीकरण के प्रयोग के लिए रायबरेली के मॉर्डन कोच कारखाने जैसी एक बेहद कामयाब परियोजना को चुना है। रेल मंत्री ने कहा कि रायबरेली मॉर्डन कोच फैक्ट्री को 2007-08 में मंजूरी दी गई थी और 2014 में हमारी सरकार बनने तक वहां एक भी कोच नहीं बना। रेल मंत्री ने कहा कि इस कोच फैक्ट्री की क्षमता प्रतिवर्ष 1000 कोच बनाने की थी और 2018-19 में 1425 कोच बने।

पांच हजार डिब्बों को नई तकनीक से बदला जाएगा
अधिकारियों के मुताबिक, अक्टूबर तक पांच हजार डिब्बों को इस नई तकनीक से बदल दिया जाएगा। इससे ट्रेन में सीटें तो बढ़ेंगी ही रेलवे को डीजल के मद में खर्च किए जाने वाले सालाना छह हजार करोड़ रुपए की बचत भी होगी। जनरेटर से ट्रेन में बिजली सप्लाई में बिना एसी के डिब्बे में प्रतिघंटे 40 लीटर डीजल की खपत होती है, जबकि एसी कोच को बिजली सप्लाई देने में हर घंटे करीब 65-70 लीटर डीजल खर्च होता है। नई तकनीक पर्यावरण के अनुकूल भी होगी, क्योंकि न तो इससे ध्वनि प्रदूषण होगा और न वही वायु प्रदूषण। इससे हर ट्रेन से कार्बन उत्सर्जन में भी हर साल 700 टन की कमी आएगी।

बुलेट ट्रेन का कार्य तय समय पर पूरा होगा
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र के पालघर में भूमि अधिग्रहण से जुड़े कुछ मुद्दों की वजह से मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के काम में थोड़ा विलंब हुआ है, लेकिन इस परियोजना को तय समय पर पूरा कर लिया जाएगा। लोकसभा में गोयल ने कहा कि पालघर में भूमि अधिग्रहण को लेकर कुछ मुद्दे हैं। हम आदिवासियों से बात कर रहे हैं। उनके मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बुलेट ट्रेन का परिचालन तय समय पर हो जाएगा।