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रेल टिकट बुक करवाने के लिए साफ्टवेयर बनाकर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 14 फरवरी। रेलवे प्रशासन ने रेल टिकट बुक करवाने के लिए साफ्टवेयर बनाकर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए गिरोह के सरगना और उसके कार्य में मदद एवं सहयोगी बताए जाने वाले दो सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया और चार आरोपितों को गिरफ्तार किया जाना शेष है। जिनकी तलाश की जा रही है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अभय शर्मा ने बताया कि महाप्रबन्धक, उत्तर पश्चिम रेलवे आनन्द प्रकाश के तत्वाधान में तथा अरूण कुमार, महानिदेशक रेसुब के निर्देशन में अरोमा सिंह ठाकुर/प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त, रेसुब जयपुर के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। शर्मा ने बताया कि दिनेश जांगिड उर्फ रोशन, बाबूलाल और विकास को गिरफ्तार किया गया है। वहीं इन लोगों से लाईव यात्रा किए जा चुके टिकटों की कीमत लगभग 53 लाख बरामद की जा चुकी है और पकड़े गए आरोपित फिलहाल जेल में है। गौरतलब है कि यात्री सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए, साफ्टवेयर डेवलप कर रेलवे ई-टिकटिंग के अवैध व्यापार में लिप्त गिरोह के द्वारा सम्पूर्ण भारत मे साफ्टवेयर डेवलप कर स्वयं इस्तेमाल किया जाता और बेचने की सूचना मिल रही थी। जिसके बाद मुख्य सुरक्षा आयुक्त निर्देशन में एक स्पेशल टीम का गठन कर गिरोह के मुखिया के दो मोबाइल नम्बरों के सीडीआर एवं उन नम्बरों को जिस आधार नम्बर की जांच पडताल करते हुए लोकेशन को ट्रेस कर आरोपित को उसके सहयोगियों समेत पकड़ा गया है। गिरोह के सरगना दिनेश जागिड उर्फ रोशन से पूछताछ में सामने आया कि उसने वर्ष 2008 में बीसीए ग्रेजुएट किया तथा वर्ष 2013 में उसे ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले स्पीडो साफ्टवेयर की जानकारी व्हाट्सएप नंबर से उसे प्राप्त हुई। जिसे आरोपित द्वारा खरीदने के लिए दस हजार रुपए दिए गए परन्तु उसे साफ्टवेयर नहीं दिया गया। जिस मोबाइल से सम्पर्क किया वह भी कुछ दिनों बाद बंद हो गया। इसके पश्चात इसका सम्पर्क मोईनुल हक से वर्ष 2014 में सम्पर्क हुआ जिसने इसे स्पीडो साफ्टवेयर का सोर्स उपलब्ध करवाया, जिसको आरोपित द्वारा मोडिफाई करते हुए आईकान साफ्टवेयर तैयार किया गया। यह साफ्टवेयर सिंगल विंडो का था। जिसका ट्रांजेक्शन केवल एसबीआई के माध्यम से कैप्चा मैनुअली उपयोग में लाया जाता था।
इस साफ्टवेयर को आरोपित दिनेश ने मोईनुल एवं शमशेर को 2.5 लाख रूपये में बेचा। शमशेर द्वारा आईकान साफ्टवेयर को रूपांतरित कर फ्रीलांसर वेवसाईट के माध्यम से ” स्पार्क ” साफ्टवेयर बनवाया गया। जिसका अपडेट उक्त आरोपित द्वारा ही दिया जाता था। तत्कालीन समय में इसे एडमिन के तौर पर एक अन्य व्यक्ति सलमान द्वारा भी इस्तेमाल किया जाता था। मार्केट में ई टिकट साफ्टवेयर यूज किए जाने वालों को पकड़े जाने के कारण आरोपित दिनेश द्वारा समय-समय पर नए-नए नाम से यथा-एचपी, काउंटर, एनगेट साफ्टवेयर का अपडेट विभिन्न लोगों को दिया जाता रहा।
वर्ष 2018 में शमशेर द्वारा नियो साफ्टवेयर जिसे अजय गर्ग ( पूर्व आईआरसीटीसी कर्मचारी ) द्वारा डेवलप किया गया था के सोर्स को यूज करते हुए आरोपित दिनेश द्वारा आई बॉल साफ्टवेयर बनाया गया। परन्तु मार्केट में हामिद के एएनएमएस साफ्टवेयर के ज्यादा प्रभावी होने के कारण पुन: मोडिफाई करते हुए वर्ष 2019 में रेडबुल साफ्टवेयर बनाया गया। आरोपित द्वारा इन समायावधि में एक मोटरसाइकिल, एक स्वीफ्ट कार तथा अहमदाबाद शहर में कृष्णा नगर में एक मकान, शेयर मार्केट में लगभग 20 लाख रुपये व पाली में एक कम्प्युटर एवं एसेसरिज की दुकान खोली गई।