Wed. Apr 24th, 2019

लाशों से भर गया कुआं और खून से रंग गया था जलियांवाला बाग’

100 साल पहले आज ही के दिन अंग्रेजों ने ऐसे रची थी जलियांवाला बाग हत्याकांड की साजिश

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (एजेंसी)। 13 अप्रैल 1919। दुनिया के इतिहास में शायद ही इससे ज्यादा काली तारीख दर्ज हो जब एक बाग में शांतिपूर्ण तरीके से सभा कर रहे निहत्थे-निर्दोष लोगों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दी गई थीं। वह जगह थी अमृतसर का जलियांवाला बाग और इस अत्याचार का सबसे बड़ा गुनहगार था जनरल डायर। उस नरसंहार को आज सौ साल हो गए। हर भारतीय का मन उस त्रासदी के जख्मों से आहत है। ब्रिटिश सरकार ने लंबा वक्त लगा दिया इस घटना पर शर्मिंदगी जताने में, माफी अभी भी नहीं मांगी है। अंग्रेजों के रौलेट एक्ट के विरोध में लोग जलियांवाला बाग में सभा के लिए एकत्र हुए थे। वहां आए लोगों में अंग्रेज सरकार के प्रति गुस्सा था, फिर भी वे शांत थे। यह एक दिन में पैदा हुआ आक्रोश नहीं था। इसकी चिंगारी 1857 में ही पैदा हो गई थी। मार्च 1919 में जब ‘न वकील, न दलील और न अपील’ वाला काला कानून पास हुआ तो लोगों ने इसका विरोध किया। इसी विरोध की बौखलाहट में अंग्रेज शासन ने जलियांवाला बाग में मानवता-सभ्यता की हदें पार कर दीं। इन्हीं जख्मों की टीस से भगत सिंह और शहीद ऊधम सिंह जैसे क्रांतिकारियों का जन्म हुआ, जिन्होंने जंग-ए-आजादी की च्वाला और तेज कर दी।

बंद था अमृतसर
छह अप्रैल को पूरा अमृतसर बंद था। टाउन हॉल के आस-पास की सड़कें तकरीबन खाली हो गई थीं, क्योंकि सब लोग जलियांवाल बाग पहुंच चुके थे। रौलेट एक्ट का विरोध कर रहे पंजाब के दो प्रमुख नेताओं डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सतपाल को गिरफ्तार कर लिया गया तो पंजाबियों का गुस्सा भड़क उठा। 10 अप्रैल 1919 को अमृतसर में दंगे भड़क गए। गुस्साए लोगों ने कई यूरोपीय लोगों को मार दिया। डायर की करतूत से भले ही इंग्लैंड आज शर्मिंदा है लेकिन भारतीयों के मन में उसके लिए नफरत आज भी जिंदा है। 13 अप्रैल को 1919 को बैसाखी का दिन था। जलियांवाला बाग में लोग पहुंच रहे थे। ठीक साढ़े चार बजे सभा शुरू हुई। जब जनरल डायर बाग में गया तो दुर्गादास भाषण दे रहे थे। ठीक पांच बजकर दस मिनट पर डायर के हुक्म से गोलियां बरसने लगीं। जान बचाने के लिए जनता भागने लगी, पर रास्ता नहीं था। बाग का कुआं लाशों से भर गया और अनेक लोग कुएं में ही मारे गए। स्वयं डायर ने एक संस्मरण में लिखा है-‘1650 राउंड गोलियां चलाने में छह मिनट से ज्यादा ही लगे होंगे।’ सरकारी आंकड़ों के अनुसार 337 लोगों के मरने और 1500 के घायल होने की बात कही गई है, किंतु दुर्भाग्य से सच्चाई आज तक सामने नहीं आई है।