September 25, 2020

लोगों का वरदहस्त ही पद दिलाएगा!

  • कांग्रेस संगठन में नियुक्तियों का काउंटडाउन शुरू

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 26 अगस्त। राजस्थान कांग्रेस में बगावत और सियासी संग्राम के बाद भले ही पार्टी ने संगठन को व्यवस्थित करने के लिए तीन लोगों की कमेटी बना दी गई हो, लेकिन अंदरखाने चर्चा यही है कि संगठन में होने वाली नियुक्तियों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का खेमा ही हावी रहेगा। इस खबर ने उन कार्यकर्ताओं की भी नींद उड़ा दी है जो बीजेपी की सत्ता को उखाड़ कर कांग्रेस की सत्ता लाने के लिए 5 साल तक पायलट के साथ मिलकर काम कर रहे थे। संगठन में नियुक्तियों को लेकर अगर प्रभारी महासचिव के सामने कोई हंगामा होता है तो उसमें भी फायदे में गहलोत निष्ठ लोग ही रहेंगे क्योंकि हंगामे के बाद मामले को शांत करने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा जोड़ी की ही होगी।

सत्ता से लेकर संगठन तक सब जगह गहलोतनिष्ठ प्रभावी
सचिन पायलट को पीसीसी चीफ के पद से हटाए जाने पहले परिस्थितियां अलग थी। प्रदेश संगठन से लेकर फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन तक सब जगह पायलट खेमे के लोगों का दबदबा था। संगठन की कमान खुद सचिन पायलट के हाथों में थी। उस सूरत में 50-50 का फॉर्मूला बन सकता था लेकिन अब परिस्थितियां पहले से बिल्कुल उलट है। पीसीसी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर सेवादल, यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई तक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निष्ठावान लोगों का दबदबा है। ऐसे में अब किसी फार्मूले की गुंजाइश कम ही बची है।

छोटी हो सकती है कार्यकारिणी
पार्टी के सूत्रों की मानें तो पिछली बार की जम्बो कार्यकारिणी का सियासी संग्राम के दौरान कोई फायदा नजर नहीं आया। उल्टे कई पदाधिकारियों ने सचिन पायलट के समर्थन में इस्तीफे दे दिए जिससे संगठन का तालमेल डोल गया था. जानकारों की मानें तो नई बनने वाली कार्यकारिणी में 50 से ज्यादा लोगों को रखने की गुंजाइश नहीं है। सियासी संग्राम के खत्म होने के बाद कांग्रेस के एक धड़े के विधायक और कार्यकर्ता यह कहते नहीं थकते कि अब पार्टी में कोई धड़ा नहीं है। अब जो भी खेमा है वह एक ही खेमा है क्योंकि अब सब एक हो चुके हैं लेकिन इस एक होने के दावों के बीच यह मैसेज देने की भी कोशिश की जा रही है कि अब होगा वही जो गहलोत चाहेंगे।